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नाना पाटेकर ने कमिश्नर से जताई थी बागपत देखने की इच्छा, दिल में ही रह गई उनकी ये तमन्ना 

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:15 AM (IST)

फिल्म स्टार नाना पाटेकर के निधन से मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ. सत्यपाल सिंह को गहरा झटका लगा है। ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नाना पाटेकर और डॉ. सत्यपाल सिंह की 1995 से गहरी दोस्ती थी।

  2. नाना पाटेकर की बागपत देखने की इच्छा अधूरी रह गई।

  3. डॉ. सत्यपाल सिंह ने अभिनेता की देशभक्ति और सेवाभाव को सराहा।

जहीर हसन, बागपत। फिल्म स्टार नाना पाटेकर के निधन से मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह को झटका लगा है, क्योंकि दोनों में दोस्ती थी। एक बार नाना पाटेकर ने उन्हें मजाकिया लहजे में सेल्यूट करते हुए उलाहना दिया था कि आप सनी देओल को बागपत ले गए, लेकिन मुझे कब अपना जिला दिखाओगे?

पुरानी यादों में खोए डाॅ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के दिग्गज कलाकार एवं संवेदनशील समाजसेवी ‘पद्म श्री’ नाना पाटेकर का निधन भारतीय कला जगत को अपूरणीय क्षति है। अपने सशक्त एवं जीवंत अभिनय से उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी है। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सेवाभाव सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

1995 में हुई पहली मुलाकात

डाॅ. सत्यपाल सिंह ने फोन पर जागरण से नाना पाटेकर से जुड़ी यादें साझा करते हुए बताया कि उनकी मुलाकात पहली बार 1995 में हुई और फिर हम दोनों दोस्त बन गए। पूना तथा बाद में मुंबई पुलिस कमिश्नर रहते हुए उनकी नानावती हास्पिटल के डाक्टर हथोलकर के यहां मुलाकात होती रहती थी। नाना पाटेकर ने 2006 में उनके द्वारा मराठी में प्रकाशित हुई किताब का भी विमोचन किया और वे उनकी बेटी की शादी में भी आए थे।

उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर नानवेज भोजन खाते थे, लेकिन कई बार अचानक घर आकर बोले कि कमिश्नर साहब आपके घर बना शाकाहारी भोजन करना है। वे जानते थे मैं शाकाहारी हूं। जब उन्होंने वर्ष 2014 में मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से इस्तीफा देकर बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ा तो उसमें प्रचार करने के लिए फिल्म स्टार सनी देओल बागपत आए थे।

चुनाव निपटने के बाद जब मुंबई में नाना पाटेकर की उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने अपनापन दिखाते हुए उलाहना दिया कि आप सनी देओल को बागपत ले गए और मुझे कब बागपत दिखाओगे।

तब मैंने कहा कि आपको बागपत किसी और दिन लेकर जाऊंगा, लेकिन अफसोस कि ऐसा कार्यक्रम नहीं बना कि उन्हें बागपत दिखा पाता, वह जब भी उनके पास आते तो अक्सर मजाक में सेल्यूट करते थे। नाना पाटेकर बेहतरीन इंसान थे, जिन्होंने फौजियों पर कई फिल्में बनाई थीं। देशभक्ति उनके अंदर कूट-कूटकर भरी थी। भगवान दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

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