जब LoC पर बरस रही थीं गोलियां, तब 'रीयल हीरो' बनकर आए नाना पाटेकर; ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 117 परिवारों के लिए बने सहारा
राजौरी और पुंछ में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार गोलीबारी से प्रभावित 117 परिवारों को नाना पाटेकर की निर्मला गजानन फाउंडेशन ने सहायता प्रदान की थी।
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पाक सेना की गोलाबारी से प्रभावित व्यक्ति को गले लगाकर मिलते नाना पाटकर फाइल फोटो। जागरण
HighLights
नाना पाटेकर ने ऑपरेशन सिंदूर प्रभावित 117 परिवारों की मदद की
निर्मला गजानन फाउंडेशन ने 42 लाख की पुनर्वास सहायता दी
नाना ने 11 वर्षीय बच्ची की पढ़ाई का जिम्मा उठाया
गगन कोहली, राजौरी। कुछ मुलाकातें थोड़ी देर की होती हैं, लेकिन उनकी याद लंबे समय तक बनी रहती है। 22 सितंबर 2025 को राजौरी में नाना पाटेकर से मिले परिवारों के लिए भी यह दिन ऐसा ही था।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पार से हुई गोलीबारी में घर, अपने और रोजी-रोटी गंवाने वाले परिवार उस दिन एकत्र हुए थे। उनके चेहरों पर दर्द और आंखों में बीते दिनों की यादें थीं। भविष्य को लेकर कई सवाल थे।
नाना पाटेकर की अपनी संस्था निर्मला गजानन फाउंडेशन ने राजौरी व पुंछ के 117 प्रभावित परिवारों के लिए उस दिन की सबसे अहम याद केवल आर्थिक मदद नहीं थी बल्कि नाना का उनके पास जाना और साथ होने का भरोसा देना उनके लिए मायने रखता था। गुरुवार को 117 प्रभावित परिवार ही नहीं पूरा राजौरी-पुंछ नाना के निधन से बेहद भावुक और गमगीन थे।
संस्था ने 117 परिवारों की मदद की
बता दें कि निर्मला गजानन फाउंडेशन ने राजौरी और पुंछ के 117 परिवारों को 42 लाख की पुनर्वास सहायता दी थी। इन परिवारों को ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीमा पार से हुई गोलीबारी में जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा था। फाउंडेशन के सहयोग ने इस काम को मानवीय पहल का रूप दिया।
बालाकोट के मोहम्मद शरीफ जिसका पाकिस्तानी गोलाबारी में मकान ध्वस्त हो गया था ने कहा कि जब नाना पाटेकर के निधन के बारे में सुना तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। परिवार के सभी सदस्य भावुक थे।
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नौशहरा के संदीप सिंह और उनके जैसे कई अन्य सीमावर्ती निवासी नाना की सादगी, आत्मीयता और उनके द्वारा दी गई राहत सामग्री व वित्तीय सहायता को देखकर बेहद भावुक हो उठे थे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता विवोध गुप्ता कहते हैं कि राजोरी-पुंछ के स्थानीय नागरिक उन्हें न सिर्फ बेहतरीन अभिनेता के रूप में, बल्कि एक मसीहा और सच्चे इंसान के तौर पर याद कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।गणमान्य नागरिक राजकुमार कहते हैं कि सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए गोलीबारी जिंदगी की हकीकत रही है।
11 वर्षीय बच्ची की पढ़ाई का जिम्मा
उस दिन का भावुक प्रसंग पुंछ की 11 वर्षीय बच्ची से जुड़ा था। गोलीबारी में पिता अमरीक सिंह को खोने वाली इस बच्ची की पढ़ाई का जिम्मा नाना पाटेकर ने उठाने की घोषणा की।
