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पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए 13 साल की उम्र में किया काम, जानें कितने पढ़े-लिखे थे नाना पाटेकर

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:46 PM (IST)

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। नाना पाटेकर ने अपनी ...और पढ़ें

Nana Patekar Education: यहां पढ़ें पूरी खबर।

Nana Patekar Education: यहां पढ़ें पूरी खबर।


HighLights

  1. पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए किया बचपन में काम।

  2. स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद 'एप्लाइड आर्ट्स' में किया डिप्लोमा।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। अपनी बुलंद आवाज और बेमिसाल अभिनय के जरिये करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। नाना पाटेकर फिल्मी जगत का केवल एक बड़ा नाम ही नहीं है। बल्कि अपने जमाने के एक होनहार छात्र भी रहे हैं।

नाना पाटेकर का बचपन बेहद ही कठिनाइयों में गुजरा है। लेकिन बावजूद इसके उन्होंने काम के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी की। उन्हें बचपन से ही कला एवं रचनात्मकता में रुचि थी। इसलिए उन्होंने अपने शौक को पेशेवर रूप देने के लिए देश के मशहूर कॉलेज से 'एप्लाइड आर्ट्स' में अपनी पढ़ाई पूरी की।

संघर्षों के बावजूद जारी रखी पढ़ाई

नाना पाटेकर के नाम से मशहूर अभिनेता का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उनका जन्म 01 जनवरी, 1951 में महाराष्ट्र के रायगण जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा मुंबई के समर्थ विद्यालय से पूरी की है। इसके बाद उन्होंने मुंबई के 'बांद्रा स्कूल ऑफ आर्ट्स' से आगे की पढ़ाई जारी रखी।

13 साल की उम्र में किया काम

नाना पाटेकर के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद ही सामान्य थी। इसलिए पाटेकर ने परिवार की आर्थिक मदद करने और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए 13 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नाना पाटेकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए सड़कों पर कट-आउट और फिल्मों के पोस्टर पर पेंट करने का काम किया करते थे। इसके लिए उन्हें 35 रुपये प्रतिमाह मिलते थे।

देश के मशहूर आर्ट कॉलेज में लिया दाखिला

नाना पाटेकर का झुकाव कला के क्षेत्र में था। इसलिए उन्होंने अपनी रुचि को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुंबई के मशहूर 'सर जेजे इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स' से 'एप्लाइड आर्ट्स' विषय में डिप्लोमा पूरा किया। 'एप्लाइड आर्ट्स' विषय से डिप्लोमा हासिल करने के बाद उन्होंने एक एजेंसी में बतौर कमर्शियल आर्टिस्ट और विजुअलाइजर के तौर पर नौकरी की।

थिएटर और नाटकों में बढ़ी रुचि

आर्ट्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद नाना पाटेकर की रुचि थिएटर और नाटकों में भी बढ़ने लगी। साल 1978 में पाटेकर ने फिल्म 'गमन' के साथ हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद ‘परिंदा', तिरंगा’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनकी अदाकारी को लोगों द्वारा खूब पसंद किया गया। पाटेकर ने केवल हिंदी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि मराठी सिनेमा और थिएटर में भी अपने दमदार अभिनय से एक अलग पहचान बनाई है।

 

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