खेकड़ा (बागपत) : सद्गुरू घीसा संत महाराज की गद्दी पर लगने वाला मेला मंगलवार को शुरू हो जाएगा। मेला कमेटी ने इसके लिए तैयारी कर ली है। मेले में दिल्ली हरियाणा राजस्थान आदि प्रदेशों से बड़ी संख्या में साधु संत व गद्दी के अनुयायी आने शुरू हो गए है।

महन्त देवेन्द्र दास महाराज ने बताया कि मेले में सोमवार से ही पूजा पाठ शुरू हो गए। मंगलवार की रात को विशाल सत्संग होगा। घीसा संत महाराज के ग्रन्थ साहिब का पाठ शुरू हो गया है। भक्तों के लिए भंडारा तीनों दिन चलता रहेगा। हरिद्वार, बनारस, गढमुक्तेश्वर, इलाहाबाद आदि से साधु संत नगर में पहुंचने लगे हैं।

ऐतिहासिक है खेकड़ा में सद्गुरू घीसा संत की गद्दी

सदगुरू घीसा सन्त कबीर पंथ के प्रमुख संत थे। अनपढ़ होने के बावजूद वे शास्त्रों के ज्ञानी थे। उनका जन्म सम्वत 1860 में नगर के गरीब कृषक सदासुख के यहां सन्त कबीरदास के आशीर्वाद से हुआ था। महन्त देवेन्द्र दास ने बताया कि पांच वर्ष की आयु में उनके पिता उन्हे काठा गांव में दशनामी सन्यासियों के मेले में ले गए। वहां एक सिद्घ ने अपनी सिद्घियों के अभिमान में शास्त्रों के प्रति अपशब्द बोल दिए तो सद्गुरू घीसा संत ने तभी उन्हे ललकारते हुए फटकार लगाई और उन्हे शास्त्रों का सच्चा ज्ञान कराया। इसके बाद 14 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर महाराज की कीर्ति पूरे उत्तरी भारत में फैल गयी। सम्वत 1925 में उनके शरीर त्याग दिया।

पांच दर्जन गद्दियां है उत्तर भारत में

सद्गुरू घीसा संत के श्रद्घालुओं ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान आदि प्रदेशों में उनकी साठ से अधिक गद्दियां स्थापित कराई। इन सभी गद्दियों का संचालन खेकड़ा की गद्दी से होता है। होली दीवाली को लगने वाले मेले में इन सभी गद्दियों पर श्रद्घालु यहा आकर ग्रन्थ साहिब के अखंड पाठ में शामिल होते हैं।

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