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    गोशालाएं क्या खुलीं, भूसे संग मटर के छिलके भी भाव खाने लगे

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 24 Feb 2019 11:59 PM (IST)

    योगी सरकार शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक गोशाला बनवाकर गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा को कटिबद्ध हैं।

    गोशालाएं क्या खुलीं, भूसे संग मटर के छिलके भी भाव खाने लगे

    बदायूं : योगी सरकार शहर से लेकर कस्बों और गांवों तक गोशाला बनवाकर गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए कटिबद्ध दिख रही है। लेकिन अब चारा की दिक्कत खड़ी हो गई है। भूसा का दाम दोगुना हो जाने से पशुपालकों को दिन में तारे नजर आने लगे हैं। चारे की मांग अधिक होने से मटर के छिलके का दामों में भी उछाल आ गया। इसलिए किसान गन्ने की पतेल व अन्य विकल्प तलाश रहे हैं।

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    जिले में कृषि के साथ पशुपालन लोगों के आय का प्रमुख स्त्रोत है। अभी तक शहर से लेकर कस्बों और गांवों में लोग पशुओं को दिन के समय छुट्टा छोड़ दे रहे थे। इससे ये पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस गंभीर समस्या का स्थायी निदान कराने के लिए नगरीय क्षेत्रों में कान्हा गोशाला और ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थायी गोशाला का निर्माण शुरू कराया है।

    वर्तमान में बदायूं जिले में खुली गोशालाओं में 8000 से अधिक गोवंशीय पशुओं का पालन हो रहा है। गोशाला संचालित करा रहे प्रधानों को शासन से प्रति पशु के हिसाब से बजट तो मिलने लगा है, लेकिन चारा का इंतजाम करना फिर भी मुश्किल हो रहा है। डेयरी चलाने वाले पशुपालकों के सामने भी चारे का संकट गहरा गया है। जिन पशुपालकों का अपना भूसा खत्म हो गया है उन्हें बाजार से भूसा खरीदने में पसीने छूट रहे हैं।

    वजह भूसा 600-700 रुपये कुंतल से बढ़कर 1100-1200 रुपये ¨क्वटल तक पहुंच गया है। मटर के छिलके प्रति ट्राली पांच हजार रुपये बिक रही है। चारा का भाव बढ़ने से पशुपालक परेशान हैं।

    पशुपालकों की बात फोटो 24 बीडीएन 52

    भूसा का रेट बढ़ गया है, इसकी वजह से पशुओं के लिए चारा का इंतजाम करने में दिक्कतें आ रही हैं। गन्ने की पतेल और कल्ले मंगाकर पशुओं को खिला रहे हैं।

    - सियाराम

    फोटो 24 बीडीएन 53

    सीजन में जो भूसा रखा था वह खत्म हो चुका है। हरा चारा भी महंगा हो गया है। मटर के छिलके की ट्राली का दाम भी दोगुना हो गया है। इसकी वजह से दिक्कत आ रही है।

    - हरवीर ¨सह

    फोटो 24 बीडीएन 54

    पशु पालने के लिए खेत में हरा चारा उगाना बहुत जरूरी हो गया है। सीजन में तो भूसा आसानी से मिल जाता है, लेकिन इस समय परेशानी होने लगी है। खेत में चारा की बुवाई कराना ही समस्या का समाधान है।

    - मनोज कुमार फोटो 24 बीडीएन 55

    अगर पहले से पता होता कि भूसे का रेट इतना चढ़ेगा तो खरीदकर रख लेते। भूसा खरीदने पर लग रहा है कि गेहूं और भूसे के भाव में ज्यादा अंतर ही नहीं रह गया है।

    - सुखदेव

    वर्जन ::

    गांवों में गोशाला का सुचारू ढंग से संचालन कराने को ग्रामसभा की जमीन पर हरा चारा बोने के निर्देश दिए गए हैं। हर पशुपालक को अपने खेत में हरा चारा उगाना चाहिए, तभी चारे की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

    - दिनेश कुमार ¨सह, डीएम