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    प्यार में छोड़ा घर, अब यूपी में SIR भरने के लिए घरवालों से एपिक ID मांग रहीं युवतियां

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 07:11 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश में, कुछ युवतियों ने प्यार में घर छोड़ दिया। अब, उन्हें एसआईआर फॉर्म भरने के लिए अपने परिवार के सदस्यों से एपिक आईडी की आवश्यकता है। घर छोड़ने के बाद, वे अपने परिवारों से संपर्क करने के लिए मजबूर हैं ताकि वे पहचान पत्र प्राप्त कर सकें, जिससे उनके लिए एक मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है।

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    जागरण संवाददाता, बदायूं। नवादा की युवती चार साल पहले प्रेमी के साथ चली गई थी। स्वजन ने प्राथमिकी दर्ज कराई तो उसने कोर्ट में प्रेमी के पक्ष में बयान दे दिए। वह पति के साथ चली गई, तब से मायके वालों से बोलचाल बंद थी। अब मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में एपिक आइडी मांगी गई तो मायके वालों की याद आई। उसने घर फोन कर 2003 की मतदाता सूची में दर्ज जानकारी मांगी।

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     एसआइआर में लगे बूथ लेवल आफीसर्स के पास ऐसे कई मामले आए, जिनमें प्रेम विवाह कर घर छोड़ने वाले युवतियां मायके वालों से बात करने को मजबूर हुईं। बुलंदशहर की रहने वाली सुलेखा करीब 10 साल पहले संग्रामपुर के रहने वाले नवाब हसन के साथ आ गई थीं। मतांतरण के बाद निकाह कर वह सुलेखा से रिहाना बन गईं। अब दो बच्चे भी हैं। इस दौरान कभी मायके वालों से बात नहीं हुई।

    पिछले विधानसभा चुनाव में किया था मतदान

    पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान भी किया था। अब एसआइआर प्रक्रिया शुरू हुई तो फार्म में पिता-अभिभावक के बारे में जानकारी मांगी गई। वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर पिता की मतदाता क्रमांक संख्या (एपिक आइडी) मांगी गई, बूथ एवं भाग संख्या मांगी गई तो सुलेखा उर्फ रिहाना को जानकारी नहीं थी। उन्होंने मां को फोन लगाया तो रुंधे गले से बातचीत हुई। जिला प्रशासन के अनुसार ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर में 70 प्रतिशत मुस्लिम और 30 प्रतिशत हिंदू आबादी निवास करती है।

    यहां के कई युवकों ने दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बंगाल, बिहार और उड़ीसा से विभिन्न संप्रदायों की युवतियों से प्रेम विवाह कर लिया था। सबसे अधिक प्रकरण इसी गांव के हैं। अब एसआइआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद पैतृक परिवार, पता, मूल निवास और पहचान से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करना इन प्रेमी जोड़ों के लिए चुनौती बन गया है। एसडीएम मोहित कुमार का कहना है कि प्रेम विवाह आदि से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इसमें कोई समस्या नहीं है।

    चुनाव आयोग की वेबसाइट पर सारा डेटा उपलब्ध है। स्वजन की एपिक आइडी देखी जा सकती है। वह नहीं भी मिल रही है तो एसआइआर गणना प्रपत्र का तीसरा विकल्प चुन सकते हैं, जिससे चार दिसंबर के बाद जो प्रक्रिया शुरू होगी, उसमें प्रतिभाग कर सकें।