यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 07, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जिंदा के सिर छत नहीं, लेकिन गोंडा में मुर्दों को मिल गया आवास
चार मृतकों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया, यही नहीं 'मृतकों' ने बैंक से पैसे भी निकाल लिए।

गोंडा (वरुण यादव)। सबको छत मुहैया कराने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में भी सेंधमारी नहीं रुक पा रही है। बमुश्किल महीना भर पहले सीतापुर में मंत्री के सामने लाभार्थियों ने पैसा लेने की पोल खोली थी तो इस बार गोंडा में बीडीओ ने फर्जीवाड़ा खोला।
यहां सेलहरी गांव में एक, दो नहीं बल्कि चार मृतकों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया। यही नहीं 'मृतकों' ने बैंक से पैसे भी निकाल लिए। अब इस मामले में गुनहगार तलाशे जा रहे हैं।
दरअसल, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर लाभार्थियों का चयन कर प्रथम किस्त के रूप में 40-40 हजार रुपये बैंक खाते में भेजे गए थे। यहां तैनात बीडीओ (ब्लॉक डेवलॅपमेंट आफिसर) को मृतकों को आवास देने की शिकायत मिली। उन्होंने एडीओ आइएसबी की अगुवाई वाली टीम से जांच कराई। जांच के दौरान आवास का लाभ पाने वाले नियामत, तमासुम, राम प्रसाद व रामफेरे मृतक पाए गए।
यही नहीं मृतकों ने बैंकों से 18 जून को पैसे भी निकाल लिए। राम प्रसाद की मौत एक दशक पूर्व हो चुकी है। बीडीओ ने मृतकों को आवास दिलाने के लिए जिम्मेदार कर्मियों को वसूली की नोटिस जारी की है।
हलधरमऊ के तत्कालीन बीडीओ डा. प्रभात द्विवेदी कहते हैं, सेलहरी गांव में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत मृतकों को आवास देने की शिकायत मिली थी। मामले की जांच एडीओ आइएसबी से कराई गई। जिसमें चार लाभार्थी चयन से पहले ही मृतक पाए गए। यही नहीं इनके खाते से पैसे भी निकाल लिए गए। संबंधित को वसूली की नोटिस जारी की जा चुकी है।
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वहीं गोंडा के प्रभारी सीडीओ वीरपाल ने बताया, प्रकरण गंभीर है। हलधरमऊ के खंड विकास अधिकारी से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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