यूपी के इस जिले में झूठी गवाही देने पर बुरे फंसे वादी और दो गवाह, अब होगी ये कार्रवाई
बदायूं में न्यायालय में झूठी गवाही देने पर वादी और दो गवाहों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया गया है। अजीत पाल सिंह ने दिशांत रस्तोगी और सुबोध रस्तोगी पर मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें उन्होंने जेवर गिरवी रखने की बात कही थी। बाद में वादी और गवाहों के मुकर जाने पर न्यायालय ने झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने के आरोप में कार्रवाई का आदेश दिया।

जागरण संवाददाता, बदायूं। न्यायालय में झूठी गवाही देना वादी और उसके दो गवाहों को महंगा पड़ गया। न्यायालय ने उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश सुयश प्रकाश श्रीवास्तव की अदालत में चल रही है। यहां बता दें कि बरेली के आंवला कस्बा निवासी अजीत पाल सिंह ने दिशांत रस्तोगी और सुबोध रस्तोगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
अजीत पाल का कहना था कि उसके पिता पुलिस विभाग में कार्यरत थे और वह बदायूं में भी तैनात रहे थे। उसकी पढ़ाई लिखाई बदायूं में हुई थी, जिससे वह तमाम लोगों को जान गया था और उसके कई घनिष्ठ मित्र भी हो गए थे लेकिन बाद में वह आंवला जाकर रहने लगे।
उसका व्यापार बदायूं में भी चल रहा था। वह शहर के मोहल्ला चाहमीर मढ़ई चौक के नजदीक रहने वाले दिशांत रस्तोगी और उसके पिता सुबोध रस्तोगी की दुकान पर आता जाता था। वहां सोने चांदी के जेवर गिरवी रखकर ब्याज पर पैसा ले जाता था। बाद में चुपके से रुपये जमा करके अपना अपने जेवर ले जाता था। उसने उनके यहां 20 जनवरी 2023 को एक चेन गिरवी रखी थी।
जब बाद में वह उसे छुड़ाने आया तो आरोपितों ने चेन नहीं दी और उनके साथ गाली गलौज की। वह अपने गवाह धीरेंद्र कुमार और धर्मेंद्र कुमार को लेकर थाने पहुंचा था। उन्होंने अपने सामने मारपीट होने की बात कही थी लेकिन जब बाद में न्यायालय में उनके बयान दर्ज हुए तो अजीत पाल सिंह ने भी मारपीट होने से इन्कार कर दिया और उसके दोनों का गवाह धीरेंद्र कुमार और धर्मेंद्र कुमार भी मुकर गए।
उन्होंने अजीतपाल को पहचानने से इन्कार कर दिया। इसको संज्ञान लेकर अपर सत्र न्यायाधीश सुयश प्रकाश श्रीवास्तव में तीनों लोगों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि आरोपितों ने जानबूझकर झूठे साक्ष्य प्रस्तुत किए। इससे उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जाए।
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