CBI और एंटी करप्शन अधिकारी बन 35 लाख की ठगी, यूपी पुलिस ने गुजरात से आरोपितों को किया गिरफ्तार
साइबर पुलिस ने गुजरात से दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने सीबीआई और एंटी करप्शन अधिकारी बनकर एक सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर नागेंद्र मिश्रा से व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा देकर 35 लाख रुपये ठगे थे। वे फर्जी नोटिस और बैंक खातों का उपयोग करते थे। पुलिस ने उनके पास से ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। यह गिरोह साइबर सरगना के संपर्क में रहकर कमीशन पर काम करता था।
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सीबीआइ और एंटी करप्शन अधिकारी बन 35 लाख ठगी के आरोपित चढ़े हत्थे - साइबर थाना की पुलिस ने गुजरात के भावनगर से दोनों अपराधियों को किया गिरफ्तार - जनवरी में सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर तीन बार में ठगे थे रुपये-सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर को तीन बार दिया था झांसा, पुलिस कर रही पड़ताल
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। सीबीआइ और एंटी करप्शन का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करने वाले दो अपराधियों सरवैया कौशिक और भगीरथ सिंह जाला को साइबर थाना की पुलिस ने गुजरात के भावनगर से गिरफ्तार किया है। दोनों ने महराजगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत झोटी के रहने वाले सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर नागेंद्र मिश्रा को सीबीआइ और एंटी करप्शन ब्यूरो का अधिकारी बनकर तीन बार में 35 लाख रुपये ठग लिए थे।
पीड़ित की शिकायत पर एसएसपी के निर्देश में विशेष टीम गठित कर शुरू की गई विवेचना में दोनों अपराधियों का नाम प्रकाश में आया था। इसके बाद पुलिस टीम गुजरात से दोनों को पकड़कर आजमगढ़ लेकर आई। पुलिस ने बदमाशों के पास से मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, बैंक पासबुक, फर्जी पहचान पत्र और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद किए हैं। जिनका उपयोग अपराधी ठगी में किया करते थे। एएसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि दो की गिरफ्तारी कर पुलिस ठगी के अन्य मामलों की जांच कर रही है।
वाट्सएप पर वीडियो काल कर दिया था झांसा
पुलिस इंस्पेक्टर नागेंद्र मिश्रा प्रयागराज से दिसंबर 2024 को सेवानिवृत्त होकर अपने घर महराजगंज चले आए थे। जनवरी 2025 में सेवानिवृत्त का रुपये मिलने के कुछ दिन बाद दोनों अपराधी सरवैया कौशिक और भगीरथ सिंह जाला ने 17 और 28 जनवरी तथा 20 फरवरी को सबीआइ और एसीबी अधिकारी बनकर वाट्सएप पर वीडियो काल कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर डराते हुए कहा जो रुपये तुम्हारे खाते में आए हैं वह गलत तरीके से अर्जित किए रुपये हैं।
दोनों ने वाट्सएप पर ही फर्जी नोटिस और कागजात भेज नागेंद्र मिश्रा को अपने झांसे में ले लिया। एक खाता नंबर देकर यह कहते हुए रुपये ट्रांसफर करने को कहा कि जांच में सही पाए जाने पर इसे वापस कर दिया जएगा। नागेंद्र ने तीन बार में कुल 35 लाख रुपये उनके दिए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में लिखित शिकायत करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था।
ये लोग हुए हैं गिरफ्तार
सरवैया कौशिक निवासी- ए-डिवीजन, अपोजिट एनसीसी आफिस, मफतनगर, बाल्मिकिवास, भावनगर, गुजरात।
भगीरथ सिंह जाला निवासी- 147/बी पटेलनगर, मिलिट्री सोसायटी के पीछे चित्रा, भावनगर, गुजरात।
ठगी के बाद मिलती थी कमिशन
गिरफ्तार अपराधियों ने बताया कि वे लगातार साइबर सरगना के संपर्क में थे। उनसे सूचना और डिटेल मिलने के बाद फर्जी अधिकारी बनकर लोगों के साथ फ्राड करते थे। फर्जी बैंक खातो में पैसे मंगाकर निकालने के बाद सरगना के पते पर भेज देते थे। इसके बदले में मोटी रकम कमीशन के तौर मिलती थी।
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