विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Ram Mandir Dhwajarohan 2025: RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- जैसा सपना देखा था, उससे सुंदर बना राम मंदिर

Published: Tue, 25 Nov 2025 12:21 PM (IST)Updated: Tue, 25 Nov 2025 02:25 PM (IST)

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत राम मंदिर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि ...और पढ़ें

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत। वीडियो से ली गई तस्वीर।

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत। वीडियो से ली गई तस्वीर।

HighLights

  1. मोहन भागवत ने किया ध्वजारोहण

  2. मंदिर को बताया सपनों से सुंदर

  3. राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया

जागरण टीम, अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वजारोहण समारोह को सभी के लिए सार्थकता का दिवस बताया। कहा, कितने ही लोगों ने स्वप्न देखा, प्रयास किए, प्राण अर्पित किए, आज उनकी स्वर्गस्थ आत्मा तृप्त हुई होगी। उन्होंने दिवंगत महंत रामचंद्रदास परमहंस, विहिप नेता अशोक सिंघल, विष्णुहरि डालमिया का भी स्मरण किया। कहा, कितने ही संत, गृहस्थ एवं विद्यार्थियों ने प्राणार्पण किया, पसीना बहाया।

मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूर्ण हो गई। डॉ. भागवत ने कहा कि रामराज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुख-शांति प्रदान करता था, आज वह फिर से नीचे से ऊपर चढ़ कर शिखर पर विराजमान हो चुका है। इसे हमने अपनी आंखों से इसी जन्म में देखा है। ध्वज धर्म का प्रतीक होता है। इतना ऊंचा ध्वज चढ़ाने में भी समय लगा, ठीक ऐसे ही मंदिर बनाने में भी समय लगा।

सत्य का प्रतिनिधित्व ओंकार से होता है

सरसंघचालक ने कहा कि सत्य का प्रतिनिधित्व ओंकार से होता है। वही ओंकार संपूर्ण विश्व को देने वाला भारत बनाना है। धर्म, ज्ञान, छाया तथा सुफल संपूर्ण दुनिया में प्रदान करने वाला भारतवर्ष बनाने का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि परम वैभव सम्पन्न, सबके लिए खुशी और शांति बांटने वाला तथा विकास का सुफल देने वाला भारतवर्ष बनाना है। यही हमारा कर्तव्य है। श्रीरामलला विराजमान से प्रेरणा लेकर हम आगे बढ़ें।

ध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा

मोहन भागवत ने कहा कि ध्वज पर कोविदार का प्रतीक रघुकुल की परंपरा से जुड़ा हुआ है। यह कचनार जैसा लगता है। यह मंदार और पारिजात दोनों के गुणों का संयुक्त रूप है। वृक्षाः सत्पुरुषाः इव अर्थात वृक्ष सत्पुरुषों के समान हैं। सूर्य भगवान धर्म के तेज और संकल्प के प्रतीक हैं। उनके रथ का चक्र एक है, रास्ता नहीं है, सात घोड़े हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए सर्प की लगाम है, सारथी के पैर नहीं हैं। क्या ऐसी गाड़ी चल सकती है। फिर भी वे बिना थके प्रतिदिन पूरब से पश्चिम जाते आते हैं।


प्रधानमंत्री व सरसंघचालक ने रामलला के दरबार में झुकाया शीश


इससे पहले श्रीराम मंदिर परिसर में राम दरबार पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन व आरती की। यहां पुजारियों ने तीनों विशिष्टजनों को रामनामी गमछा ओढ़ाया व प्रसाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर रामलला का भी आशीर्वाद प्राप्त किया।