Ram Mandir: असत्य का ढोल पीटने वालों को मिला करारा जवाब, अयोध्या आकर कांची शंकराचार्य ने की भगवान राम की विशेष अनुष्ठान पूजा
प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व की विशेष पूजा के लिए कांची शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती का अयोध्या पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि रामलला के नए मंदिर में विराजमान होने को लेकर सनातन के शीर्षस्थ धर्माचार्यों की प्रसन्नता और श्रद्धा अगाध है। शंकराचार्य की विशेष पूजा से उन लोगों को करारा जवाब मिल गया जो प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शंकराचार्यों की भागीदारी नहीं होने का ढोल पीट रहे थे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या में राम लला के प्राण प्रतिष्ठा के भव्य-दिव्य अवस्मरणीय आयोजन से पूर्व सनातन संस्कृति के शिरोधार्यों में एक कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकर विजेंयद्र सरस्वती ने तमिलनाडु के कांची मठ से आकर भगवान राम की विशेष पूजा अर्चना की। कांची पीठाधिपति ने भगवान राम की पूजा के लिए विशेष मंत्रों का जाप कर प्राण प्रतिष्ठा की वैदिक रीति के सारे अनुष्ठानों को पूरा किया।
जन्मभूमि पर बन रहे ऐतिहासिक मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा कर शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या से लेकर दक्षिण भारत में रामेश्वरम तक भगवान राम के अद्वितीय स्वरूपों के सनातन जुड़ाव के धागे को मजबूती दी। इतना ही नहीं शंकराचार्य की इस विशेष पूजा से उन लोगों को करारा जवाब मिल गया जो रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शंकराचार्यों की भागीदारी नहीं होने के असत्य का ढोल पीट रहे थे।
कांची शंकराचार्य का अयोध्या पहुंचना इस बात का प्रमाण
प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व की विशेष पूजा के लिए कांची शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती का अयोध्या पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि रामलला के नए मंदिर में विराजमान होने को लेकर सनातन के शीर्षस्थ धर्माचार्यों की प्रसन्नता और श्रद्धा अगाध है। सनातन के सभी प्रमुख संत इस अदृभुत अवसर पर पूरी श्रद्धा भक्ति से रामलला के जन्मस्थान पर विराजमान होने के पावन मौके पर अभिभूत हैं और दक्हषिण में तमिलनाडु से लेकर अयोध्या तक संपूर्ण देश में सनातन के पुनर्जागरण दौर के साक्षी बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व स्वामी विजयेंद्र सरस्वती का कांची से विशेष रूप से अयोध्या आना बेहद महत्वपूर्ण इसलिए रहा कि शंकराचार्यों के इस आयोजन से दूरी को सियासी मुदृा बनाने वालों की जुबान पर तला लग गया। कांची शंकराचार्य रविवार को सुबह अयोध्या पहुंचे ओर राम जन्म भूमि क्षेत्र में यज्ञशाला पूजा और प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठानों को आशीर्वाद दिया।
अयोध्या पहुंचने पर परमपावन स्वामी विजयेंद्र का संघ के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल आदि ने हवाई अड्डे पर स्वागत किया गया और वे सीधे देवकाली मंदिर गए। देव काली मंदिर भगवान श्रीराम के कुल देवता हैं। वहां पूजा करने के बाद वे शंकर मठ पहुंचे जहां भैयाजी जोशी ने उनकी अगवानी की। तत्पश्चात श्रीराम सन्निधि में कलशाभिषेक किया, जहां राम षडाक्षरी हवन आयोजित किए गए। शंकराचार्य ने अयोध्या शंकर मठ के लिए एक नई वेबसाइट भी लांच की।
राम जन्म भूमि पर परम पावन
कांची शंकराचार्य स्वामी विजयेंद्र सरस्वती ने रविवार को प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व विशेष्ज्ञ पूजा के लिए राम जन्मभूमि पहुंचे तो गोविंददेवजी महाराज, कोषाध्यक्ष, रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, गणेश्वर द्रविड़ और श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित सहित अन्य वेद विद्वानों द्वारा पूर्ण कुंभ स्वागतम के साथ उनकी अगवानी की गई। इसके बाद स्वामी ने यज्ञशाला की परिक्रमा की तथा सभी कलशों में पुष्प अर्पित किये।
बाद में शंकराचार्य केंद्रीय कलश में आए और मंत्रोच्चार के बीच हरथी का प्रदर्शन किया। परम पावन ने राम भगवान पर विशेष मंत्रों का जाप किया और फिर नए मंदिर की ओर प्रस्थान किया। प्रवेश करने से ठीक पहले मंदिर के पहले चरण में नारियल तोड़ा गया, उसके बाद पहले दो स्तंभों के सामने दो और नारियल फोड़े गए, जिन पर गणेश जी अंकित थे।
बाद में परम पावन महामंतप, अर्ध मंडप के अंदर गए और फिर गर्भ गृह में प्रवेश किया। विग्रह के न्यास के बाद कांची पीठ प्रमुख ने भगवान को विशेष अभारणम् प्रस्तुत किये। फिर परम पावन को अर्ध मंडपम में शॉल और अन्य सम्मान दिए गए जहां वैदिकों का अभिनंदन किया गया। इस विशेष अनुष्ठान पूजा के बाद शंकराचार्य कांची रविवार को ही कांची लौट गए।
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