Updated: Sat, 28 Jun 2025 09:13 PM (IST)
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अंतिम चरण में है। 14 लाख घन फीट पत्थर में से 13 लाख का उपयोग हो चुका है। नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि मंदिर के परकोटे पर रामकथा के प्रसंगों का अंकन जारी है। सुरक्षा के लिए खिड़कियों पर टाइटेनियम की जाली लगाई जा रही है। वैकल्पिक गर्भगृह जहाँ रामलला पहले विराजमान थे को धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा।
संवाद सूत्र, अयोध्या। राम मंदिर और उसका परकोटा निर्मित करने में कुल 14 लाख घन फीट पत्थर का प्रयोग होना है और अब तक के निर्माण में 13 लाख घन फीट पत्थर का प्रयोग हो चुका है। यानी मंदिर का निर्माण अंतिम दौर में है और जुलाई के अंत तक शेष एक लाख घन फीट पत्थर का भी उपयोग सुनिश्चित होना है। यह जानकारी राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने दी।
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वह रामजन्मभूमि परिसर स्थित मंदिर निर्माण समिति की बैठक के पहले दिन संवाददाताओं से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने निर्माण के अन्य प्रकल्पों के भी बारे में जानकारी साझा की। मिश्र के अनुसार मंदिर की आठ सौ फीट लंबी और आयताकार लोअर प्लिंथ पर रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के अंकन का अभियान भी उत्तरार्द्ध की ओर है और अब तक पांच सौ फीट प्लिंथ रामकथा के अंकन से सज्जित की जा चुकी है।
मंदिर का 780 मीटर लंबे आयताकार परकोटे की दीवार भी रामकथा के प्रसंगों से सज्जित की जा रही है। इस पर कांस्य के 80 पैनल लगाए जाने हैं। 45 लग भी चुके हैं। इन सभी पैनल पर रामकथा के चुनिंदा प्रसंग उत्कीर्ण होंगे। यह काम भी जुलाई तक पूरा होने का अनुमान है। तीन तल के मंदिर में कुल 32 खिड़कियां हैं और मंदिर की सुरक्षा को ध्यान में रख कर इन सभी खिड़कियों पर टाइटेनियम की जाली लगाई जा रही है।
शनिवार को एक खिड़की पर टाइटेनियम की जाली लगाए जाने का भी सफल प्रयोग कर लिया गया। मिश्र के अनुसार 15 अगस्त तक सभी 32 खिड़कियों पर जाली लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। मिश्र ने बताया कि टाइटेनियम हल्की, किंतु बहुत ही मजबूत धातु है और यह एक हजार वर्ष से भी अधिक समय तक सुरक्षित रहेगी।
धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा वैकल्पिक गर्भगृह
मंदिर निर्माण समिति उस वैकल्पिक गर्भगृह को भी धरोहर की तरह सहेजेगी, जिसमें रामलला 25 मार्च 2020 से 22 जनवरी 2024 तक मंदिर निर्माण की अवधि तक स्थापित रहे। यद्यपि भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण के बाद मूल गर्भगृह में रामलला की वापसी के बाद इस गर्भगृह की उपयोगिता भले ही नगण्य रह गई, किंतु धरोहर के रूप में समिति इसे सुदीर्घ काल तक के लिए सहेजने का प्रबंध कर रही है। यह गर्भगृह मूलत: फाइबर से निर्मित है और अब उसे सागौन की लकड़ी से मौलिक आकार में ही बनाए रखने की तैयारी हो रही है। इसे अनब्रेकेबल शीशे से संरक्षित किया जाएगा।
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