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    Ayodhya Land Rate : अब अयोध्या नगरी में भूमि खरीद में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे लोग, यह वजह आई सामने- बढ़ गई अफसरों की चिंता

    गत वर्ष इस अवधि में बैनामों की संख्या 5400 थी जो इस वर्ष 5342 से आगे नहीं बढ़ी। इसी तरह उपरोक्त आंकड़ों के आधार पर सोहावल के उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री से गत वर्ष 30 अगस्त तक लक्ष्य में 116 प्रतिशत अधिक का उछाल आय में रहा। इस वर्ष की अवधि में करीब 31 प्रतिशत वह नीचे लुढ़क गया।

    By Anand Mohan Pandey Edited By: Mohammed Ammar Updated: Sun, 01 Sep 2024 07:53 PM (IST)
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    अचानक आई रजिस्ट्री में गिरावट से राजस्व विभाग भी चिंतित है।

    आनंदमोहन, अयोध्या। अयोध्या में भूमि खरीद के घटते उत्साह के बीच रजिस्ट्री से होने वाली आय में कमी ने सरकारी अमले को चौंका दिया है। यह खबर सात वर्ष के बाद बढ़ने वाले प्रस्तावित सर्किल रेट के बीच से छन कर आई है। इसका सीधा संबंध रामनगरी के आसपास सदर तहसील व सोहावल तहसील के शहर से लगे गावों में भूमि खरीद से है। यह आकलन उपलब्ध आंकड़ों के आधार है जो एक अप्रैल से 30 अगस्त के बीच के हैं।

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    31 प्रतिशत नीचे लुढ़का आंकड़ा 

    इस अवधि में गत वर्ष के मुकाबले राजस्व में करीब नौ प्रतिशत की गिरावट निबंधन कार्यालय सदर की है। गत वर्ष 29 अगस्त तक उसकी रजिस्ट्री से आय 82.43 प्रतिशत रही जिसके सापेक्ष इस वर्ष इसी अवधि में यह आय 73.94 प्रतिशत है। रजिस्ट्री की संख्या भी 58 कम है।

    गत वर्ष इस अवधि में बैनामों की संख्या 5400 थी जो इस वर्ष 5342 से आगे नहीं बढ़ी। इसी तरह उपरोक्त आंकड़ों के आधार पर सोहावल के उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री से गत वर्ष 30 अगस्त तक लक्ष्य में 116 प्रतिशत अधिक का उछाल आय में रहा। इस वर्ष की अवधि में करीब 31 प्रतिशत वह नीचे लुढ़क गया। रजिस्ट्री में भी गिरावट से संख्या 556 कम है। पिछले वर्ष 3787 रजिस्ट्री हुई थीं इस यह संख्या बार 3231 है।

    पहले महंगे रेट में भी लोग खरीद रहे थे जमीन

    सुप्रीम फैसले के बाद राम मंदिर के निर्माण से लेकर प्राण प्रतिष्ठा के बाद जून व जुलाई महीने तक रामनगरी के निबंधक कार्यालय सदर ही नहीं कार्यालय सोहावल में भी शहर के आसपास के गावों में जमीन खरीदने वालों की भीड़ रहती थी जो व्यावसायिक मकसद से सर्किल रेट से कई गुना अधिक दाम किसानों को देने से नहीं हिचकते थे। अगस्त में यकायक लुढ़के राजस्व ने निबंधन विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं।

    अधिकारी घटते राजस्व का कारण खोजने में लगे हैं। कोई बरसात को कारण बता रहा है तो कोई आसपास की भूमि बिक जाने का हवाला देने लगा है। स्थिति यह है कि घटते राजस्व को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बोलने को तैयार नहीं है। लंबे समय तक प्रदेश में रजिस्ट्री से सर्वाधिक आय वाले टाप टेन जिलों में अयोध्या का दबदबा रहा।

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