Ayodhya News : फिदायीन हमले की बरसी पर रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा सख्त, 20 वर्ष पहले किया गया था हमला
Ayodhya Fidayeen Attack 20th Anniversary राम मंदिर सुरक्षा के एसपी बाल रामाचारी दुबे ने बताया कि राम मंदिर में सीआरपीएफ एसएसएफ पीएसी के साथ स्थानीय पुलिस तैनात है। राम मंदिर के आसपास 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जहां 24 घंटे मॉनिटरिंग भी की जाती है। एंटी ड्रोन सिस्टम को भी लागू कर दिया गया है।

जागरण संवाददाता, अयोध्या : राम मंदिर पर फिदायीन हमले की 20वीं बरसी को लेकर रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा सख्त कर दी गई है। परिसर के चप्पे-चप्पे की निगरानी बढ़ा दी गई है।
रामपथ व रामजन्मभूमि परिसर के चारों ओर आने-जाने वाले सभी वाहनों की शुक्रवार की शाम सघन चेकिंग कराई गई और अनावश्यक रूप से परिसर के आसपास घूम रहे लोगों से पूछताछ की गई और उनके परिचय पत्रों की चेकिंग की गई। एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे ने रामजन्मभूमि चौकी प्रभारी सुनील कुमार व कमांडो दस्ते के साथ रामजन्मभूमि परिसर का निरीक्षण कर चेकिंग व्यवस्था का मुआयना किया और तैनात सुरक्षाकर्मियों को पूरी सजगता से ड्यूटी निभाने के निर्देश दिए।
एसपी सुरक्षा ने रामकोट, राम गुलेला, रामजन्मभूमि पथ, यात्री सेवा केंद्र, अंगद टीला व वीवीआइपी द्वार सहित अन्य स्थानों पर पहुंच कर यहां की व्यवस्था का निरीक्षण किया और सघन चेकिंग के बाद ही दर्शनार्थियों व अन्य कर्मियों को प्रवेश देने के निर्देश दिए। एसपी बलरामाचारी दुबे ने कहा कि प्रत्येक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वाच टावर से निगरानी बढ़ाने को कहा गया है।
बाल रामाचारी दुबे ने बताया कि राम मंदिर में सीआरपीएफ, एसएसएफ, पीएसी के साथ स्थानीय पुलिस तैनात है। राम मंदिर के आसपास 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जहां 24 घंटे मॉनिटरिंग भी की जाती है। एंटी ड्रोन सिस्टम को भी लागू कर दिया गया है।
तेज धमाका और हर तरफ अफरा-तफरी, सहम गई थी राम नगरी
आज से 20 वर्ष पहले यानी 5 जुलाई 2005 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर की बैरकेटिंग के पास तेज धमाका होता है। इस धमाके से कुछ दूर की बैरकेटिंग का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है। आतंकियों की योजना अयोध्या में बने प्रभु राम के अस्थाई मंदिर को रॉकेट लांचर और ग्रेनाइट से उड़ाने की थी। आतंकियों ने गोलियां चलानी भी शुरू कर दी थी, दो आतंकी का मकसद प्रभु राम के टेंट को उड़ाना था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने पांचों आतंकियों को मार गिराया था। 20 वर्ष बाद अयोध्या की तस्वीर पूरी तरह से बदलती नजर आ रही है।
रामलला तक फटकने से पहले ही खत्म हुई आतंकियों की कहानी
राम मंदिर पर हमले की घटना आतंकियों की दुर्भावना-दुस्साहस, रामजन्मभूमि परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मियों के असाधारण शौर्य और सबसे बढ़कर रामलला की महिमा-गरिमा के लिए जानी जाती है। उस हमले की आपदा का सामना कर चुकी पीढ़ी के लिए उसकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। कृष्णचंद्र सिंह ने हमले का सामना बहुत निकट से किया और उनसे इस हमले का अनुभव साझा करना रोचक तथा हमले से जुड़ी धारणाओं को प्रामाणिकता प्रदान करना है। कृष्णचंद्र सिंह उस समय परिसर की सुरक्षा में लगी पीएसी की 11वीं बटालियन के कंपनी कमांडर थे। जब आतंकियों ने जीप ब्लास्ट से पूर्वोत्तर की बैरीकेडिंग उड़ा कर परिसर में प्रवेश किया, तब वह अपने ड्यूटी प्वाइंट से कोई सौ मीटर दूर चाय पी रहे थे। ब्लास्ट की आवाज से वह पहले ही असहज हो चले थे, तभी जीप के बदहवास ड्राइवर ने बताया कि आतंकियों ने उसकी जीप छीन कर ब्लास्ट कर दी और मंदिर परिसर में प्रवेश किया है। कृष्णचंद्र सिंह चार-पांच पीएसी के जवानों के साथ आतंकियों की दिशा में भागे। आतंकियों के पास सौ से अधिक ग्रेनेड, राकेट लांचर, पिस्टल और एके 47 जैसे अत्याधुनिक असलहे थे। जवाबी कार्रवाई के लिए रिवाल्वर व जवानों की एसएलआर थी। दस बजते-बजते हमारी टीम ने तीन आतंकियों को गोलियों की बौछार से ढेर कर दिया। पीएसी के जवानों की एसएलआर ने एक बार पुन: सघन प्रवाह के साथ आग उगली और इस तरह सभी पांच आतंकियों की कहानी रामलला के पास फटकने से पहले ही समाप्त हो गई।
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