Ayodhya News: वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तैयार रामनगरी, लगातार बढ़ रही नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा
अयोध्या में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय और नगर निगम मिलकर काम करेंगे। विश्वविद्यालय अपने वायु गुणवत्ता शोध के नतीजे नगर निगम को देगा जिसके आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल से यह संभव हो रहा है। शोध में नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल कणों की मात्रा बढ़ने की बात सामने आई है।

प्रवीण तिवारी, जागरण अयोध्या। अब डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय व नगर निगम मिलकर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करेंगे। विवि में हो रहे वायु गुणवत्ता के शोध का आउटकम नगर निगम से साझा किया जाएगा, जिस पर होमवर्क कर निगम प्रशासन वातावरण से प्रदूषण के तत्वों को दूर करने की दिशा में कार्य करेंगे।
यह सब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल से संभव हो सका है। इस प्रयोग से रामनगरी की वायु की गुणवत्ता बढ़ सकेगी। विवि के पर्यावरण विभाग के संयोजन में अयोध्या के वायु प्रदूषण पर शोध होता है। सप्ताह में दो बार सैंपलिंग की जाती है।
इसी से निकले आंकड़े अब नगर निगम को दिये जाएंगे। रिपोर्ट के आधार पर निगम प्रशासन वायु में मिश्रित हानिकारक तत्वाें को अलग करने के लिए होमवर्क करेगा। वायु मंडल को प्रदूषण से मुक्ति दिलायेगा। इस सिलसिले में नगर आयुक्त व कुलसचिव विनय कुमार सिंह के बीच मंत्रणा हुई।
शोध करने वाले पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी से शुक्रवार को नगर आयुक्त की बातचीत भी हुई। डॉ. चौधरी ने इसकी पुष्टि की। वह ही नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी मानीटरिंग प्रोग्राम के कर्ताधर्ता हैं।सयह प्रोग्राम उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चला रहा है।
परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण परियोजना से रामनगरी की वायु गुणवत्ता को मापा जाता है। पिछले पांच वर्ष से यह कार्य हो रहा है। जिले में दो अनुश्रवण स्थल चयनित हैं। यह यंत्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग तथा अयोध्या धाम के दिगंबर अखाड़ा के भवन पर लगा हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. चौधरी बताते हैं कि गत पांच वर्ष के अध्ययन से यह पता चलता है कि यहां बड़ी औद्योगिक इकाइयां न होने से सल्फर ऑक्साइड की समस्या नहीं है लेकिन यहां निर्माण के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
ये खतरनाक स्तर से अभी नीचे है। अयोध्या के विकास के कारण पर्यावरण में 10 माइक्रोन के धूल के कण विद्यमान हैं। इसकी मात्रा लगभग दोगुनी हो गई है। इसकी वजह गत तीन वर्षों में निर्माण कार्यों में हुई अत्यधिक वृद्धि है।
सल्फर, नाइट्रोजन आक्साइड और पार्टीकुलेट मैटर का होगा मापन
अयोध्या : इस शोध से वायुमंडल में सल्फर आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और कणिकीय पदार्थ (पीएमटेन) की उपलब्धता देखी जाती है, इनका तत्वों पर गंभीर प्रभाव देखा जाता है। सल्फर आक्साइड श्वसन रोगों को बढ़ाता है व अम्लीय वर्षा से फसलों, मिट्टी, जल और धरोहरों को नुकसान पहुंचाता है।
नाइट्रोजन आक्साइड से फेफड़ों में जलन, दमा की समस्या होती है व बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। यह साथ-साथ भूतलीय ओजोन व स्माग का निर्माण करता है, जो पर्यावरण और कृषि के लिए हानिकारक है।
धूल के कण भी बनते आकस्मिक निधन का कारक
डॉ. विनोद कुमार चौधरी बताते हैं कि धूल के कणों की अधिकता मनुष्य पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। ये फेफड़ों और रक्त प्रवाह तक पहुंच कर हृदय रोग, कैंसर और समयपूर्व मृत्यु का कारण भी बनते हैं। ये प्रदूषक जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन बढ़ाते हैं।
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