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    1962 की जंग में अमरोहा ने खोया अपना लाल कृपाल सिंह

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 18 Jun 2020 12:10 AM (IST)

    पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण को लेकर चीन से हिसक झड़प होने से लोगों में गुस्सा है।

    1962 की जंग में अमरोहा ने खोया अपना लाल कृपाल सिंह

    गजरौला : पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अतिक्रमण को लेकर चीन से हिसक झड़प में भारतीय बीस जवानों की शहादत ने पुराने जख्म भी ताजा कर दिए हैं। चीन से 1962 की जंग में अमरोहा के जवान कृपाल सिंह भी शहीद हुए थे। परिवार के साथ क्षेत्र के बुजुर्गों को भी पुराने जख्म याद आ गए। उन्हीं की चर्चा परिवार व क्षेत्र के लोग करने के साथ देश के लिए बलिदान देने वाले कृपाल सिंह की शहादत पर गर्व भी महसूस किया जा रहा है। कृपाल सिंह की देश की सेवा का ऐसा जज्बा था कि वह शादी के चार-पांच दिन बाद ही अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे। उसके बाद घर आना नहीं हुआ। चीन से जंग छिड़ने पर शहीद हो गए। घर वालों को तार के जरिए ही उनकी शहादत की जानकारी हुई थी। परिवार व गांव के बुजुर्ग 1962 की चीन से जंग में शहीद कृपाल सिंह को यादकर यही चर्चा कर रहे हैं। कौन थे शहीद कृपाल सिंह

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    अमरोहा जनपद के गजरौला के गांव भानपुर निवासी भरे सिंह के छह बेटों में सबसे बड़े कृपाल सिंह थे। वह जाट रेजीमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए। बरेली में प्रशिक्षण पूरा होने पर घर लौटे कृपाल सिंह की पिता भरे सिंह ने अमरोहा के ही गांव जगुवा खुद की लाड़वती से शादी कर थी। शादी के चार-पांच दिन बाद ही कृपाल सिंह को अपने तैनाती स्थल पर जाना पड़ा। चीन से जंग छिड़ने पर देश की रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। 22 अक्टूबर 1962 भारत-चीन के युद्ध में शहीद कृपाल सिंह की शहादत का जिक्र तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 27 अगस्त 1963 को विधवा लाड़वती को भेजे संवेदना संदेश में भी किया था। तार के जरिए परिजनों को हुई कृपाल सिंह की शहादत की जानकारी

    गजरौला : शहीद कृपाल सिंह की याद ताजा करते हुए लाड़वती ने बताया कि शादी के बाद वह अपने मायके चली गई थी। फौजी यानी कृपाल सिंह डयूटी चले गए थे। उसके बाद उनका दुबारा मिलना नहीं हुआ। घर के लोगों से उन्हें जानकारी हुई थी कि देवोत्थान के दिन डाकिया तार लेकर पहुंचा था, उसने ही पढ़कर बताया था कि कृपाल सिंह जंग में शहीद हो गए हैं। भानपुर गांव की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि जिस वक्त डाकिया तार लेकर घर पहुंचा था। कृपाल सिंह की मां मृर्ति देवी घर में हाथ की चक्की पर आटा पीस रही थी। पिता खेती के काम में व्यस्त थे। बेटे की शहादत सुनकर आंसू भर आए थे। शहीद कृपाल सिंह के भाई का बेटा है आर्मी में

    गजरौला : लाड़वती ने बताया कि सरकार से 1975 में भूमि मिलने पर वह, उनका देवर होमपाल सिंह मंडी धनौरा के गांव फतेहउल्लापुर में बस गए। होमपाल सिंह के तीन बेटों में बडा निरंकार सिंह आर्मी में है। उसकी तैनाती लखनऊ में है। चीन से झड़प में बीस जवानों की शहादत के बाद आर्मी को अलर्ट किए जाने पर यह जानकारी निरंकार सिंह ने ही लाड़वती व पिता होमपाल सिंह को दी। निरंकार सिंह की शादी हो चुकी है। उसने अपना घर गजरौला में भानपुर रेलवे फाटक के समीप बना लिया है। यहीं आज कल लाड़वती, होमपाल सिंह निरंकार सिंह के बच्चों के साथ रह रहे हैं। शहीद कृपाल सिंह के चार अन्य भाइयों में सोमपाल रेलवे से रिटायर हो चुके हैं। तेजपाल व शीशपाल अग्निशमन विभाग में है। धर्मपाल आर्मी में है।