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    MNREGA Scheme: मनरेगा से यूपी के मजदूरों ने क्यों मोड़ लिया मुंह? प्रधान जी ने भी बना ली है दूरी

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 09:43 PM (IST)

    तिलोई अमेठी में मनरेगा योजना से मजदूरों का मोह भंग हो रहा है। समय पर मजदूरी न मिलना और कम मजदूरी मिलना मुख्य कारण है। एनएमएमएस प्रणाली से ग्राम प्रधानों की रुचि भी कम हो गई है। कई मजदूरों को 100 दिन का रोजगार भी नहीं मिल पाया है जिससे योजना की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।

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    मनरेगा से मजदूरों का मोहभंग, प्रधान भी नहीं ले रहे रुचि

    जागरण संवाददाता, तिलोई, (अमेठी)। मजदूरी भुगतान में अनिश्चितता और गांव में प्रचलित मजदूरी से कम मजदूरी निर्धारित होने के कारण मनरेगा योजना से मजदूरों का मोह भंग हो गया है। साथ ही उपस्थिति दर्ज करने में एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल मानिटरिंग सिस्टम) प्रणाली में हेड काउंट तकनीकी लागू होने से ग्राम प्रधान भी मनरेगा में रुचि नहीं ले रहे हैं।

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    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मजदूरों के हितों के लिए चलाई गई थी, लेकिन लाल फीताशाही के चलते मजदूरों का भला नहीं हो रहा है। मनरेगा में कार्य करने वाले मजदूरों को 252 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलती है। वह भी कब खाते में आएगी। इसकी कोई गारंटी नहीं है।

    जबकि गांवों में 300 से 350 रुपये की दिहाड़ी है, वह भी नकद मिलती है। इसलिए बड़े पैमाने पर मजदूरों ने मनरेगा से किनारा कर लिया है। ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त और 15 वें वित्त से होने वाले कार्यों में मजदूरी एक सप्ताह में मजदूरों के खाते में पहुंच जाती है। इस लिए चहेते लोगों को ही काम मिलना इसकी असफलता भी एक कारण है।

    आलम यह है कि बीते छह महीने में तिलोई और सिंहपुर क्षेत्र में एक भी जाब कार्डधारक को 100 दिन का रोजगार नसीब नहीं हुआ है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो मनरेगा के योजना के तहत सिंहपुर की 58 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 11 ग्राम पंचायतों में तथा तिलोई विकास क्षेत्र की 59 ग्राम पंचायतों में महज 15 ग्राम पंचायतों में मनरेगा की औपचारिकता निभाई जा रही है।

    नए वित्तीय वर्ष में एनएमएमएस ऐप पर हेड काउंट तकनीकी से उपस्थिति दर्ज होने की वजह भी मनरेगा में ब्रेक का एक कारण माना जा रहा है। मार्च से अब तक किसी भी जाब कार्ड धारक श्रमिक को 100 दिन का रोजगार नसीब नहीं हुआ है। लिहाजा ग्राम पंचायतें नए कार्यों को सृजित करने में अक्षम साबित हो रही हैं। जहां बजट और काम होता है, वहां उन्हीं श्रमिकों को काम देने में वरीयता दी जाती है, जो ग्राम प्रधान के नजदीकी होते हैं। काम मिल भी गया तो मजदूरी कब मिलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

    इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा के चल रहे कार्य

    सिंहपुर विकास क्षेत्र के अंतर्गत चिलौली, दांदूंपुर, डांगी बरवलिया, फूला, गढ़ी महाबल, जिजौली, खाना पुर चपरा, नौखेड़ा, रामगंज, रवलिया मंझार, सातन पुरवा और तिलोई विकास क्षेत्र के अकबरपुर फर्शी, आशापुर रुरु, भदसाना, भेलाई कला, चेतरा बुजुर्ग, छतहुआ, कूरा, कोटवा, नसरत पुर, ओनडीह, पूरे दूंदी, पूरे मनीमनोहर, रजनपुर, संग्रामपुर, शाहमऊ में मनरेगा योजना का संचालन हो रहा है।

    ग्राम पंचायतें गांव की कार्य योजना के अनुसार वरीयता क्रम और श्रमिकों के रोजगार की मांग के अनुसार आनलाइन आईडी जनरेट कराकर एस्टीमेट तैयार करवाकर मनरेगा योजना से जाब कार्ड धारक श्रमिकों को रोजगार देने में सक्षम हैं। मेरे स्तर से कोई देरी नहीं होती है। प्राक्कलन तैयार होकर मेरी साइट पर आते ही वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाती है। राज कुमार शर्मा, खंड विकास अधिकारी तिलोई