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    बच्चों को एमडीएम उपलब्ध कराना प्रधानाध्यापकों के लिए बड़ी चुनौती

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 04 Jul 2022 12:09 AM (IST)

    शासन की ओर से दो साल से नहीं की गई है कीमती में बढ़ोतरी

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    बच्चों को एमडीएम उपलब्ध कराना प्रधानाध्यापकों के लिए बड़ी चुनौती

    अमेठी : प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को मिड डे मील योजना के तहत पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। महंगाई की मार ने मिड डे मील का स्वाद बिगाड़ दिया है। बढ़ती महंगाई और दो वर्षों से मिड-डे मील के कन्वर्जन कास्ट में कोई बढ़ोतरी न होने से बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना प्रधानाध्यापकों के लिए चुनौती बन गया है।

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    लगातार महंगाई बढ़ने के कारण दाल, सब्जियों तथा दूध का मूल्य भी आसमान छू रहा है। विद्यालयों में मेन्यू के अनुसार दोपहर में ताजा भोजन दिया जाता है। विभाग के अनुसार प्राइमरी स्कूल में प्रति बच्चा चार रुपये 97 पैसे के दर से तो वहीं जूनियर स्कूलों में 7 रुपये 45 पैसे की दर से खाना पकाने के लिए धनराशि भेजी जाती है। सरकार की ओर से प्राइमरी के प्रति छात्र 100 ग्राम और जूनियर में चावल व गेहूं दिया जाता है। शिक्षक पवन कुमार पांडेय, आशुतोष मिश्रा, अशोक सिंह के मुताबिक कन्वर्जन कास्ट में गत दो सालों से एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इस धनराशि में तेल, नमक, मसाले, सब्जी दूध, चीनी, गैस लेना कठिन हो रहा है। यह है मिड डे मील के तहत बनने वाले भोजन का मेन्यू

    सोमवार सब्जी, रोटी

    मंगलवार सब्जी, चावल

    बुधवार तहरी और दूध

    गुरुवार रोटी, सब्जी युक्त दाल

    शुक्रवार तहरी

    शनिवार सब्जी, चावल यह है कन्वर्जन कास्ट की दर

    विभाग के मुताबिक पिछले दो वर्षो से कन्वर्जन कास्ट में बढ़ोतरी नहीं हुई है। सोमवार को उपलब्ध कराए जाने वाले फल के लिए प्रति बच्चे हेतु चार रुपये आवंटित किए जाते हैं, जबकि बुधवार को दिए जाने वाले दूध के लिए कन्वर्जन कास्ट में से ही खर्च किया जाता है। इसके अलावा रसोई गैस के लिए भी अलग से राशि नहीं दी जाती है। मिड-डे-मील की कन्वर्जन कास्ट से ही इसका भी खर्च निकाला जाता है।

    शासन की ओर से दरों का निर्धारण किया जाता है। दो साल पहले इस दर का निर्धारण हुआ था। सभी विद्यालयों में एमडीएम का संचालन हो रहा है।

    आरके कश्यप, खंड शिक्षाधिकारी संग्रामपुर