Amethi Lok Sabha Result 2024: किशोरी लाल शर्मा ने रचा जीत का नया इतिहास, संगठन में अंतर्कलह के कारण हारी स्मृति ईरानी
Amethi Lok Sabha Result 2024 - आम चुनाव 2024 में कांग्रेस या कहें राहुल-प्रियंका के ‘हाथ’ को अमेठी की जनता का साथ मिल गया। मात्र 17 दिन में उनके उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा ने जीत का एक नया इतिहास रच दिया। यह इसका भी प्रमाण है कि जनता जब साथ देने पर आती है तो कोई भी ताकत उसके फैसले को बदल नहीं पाती है।

दिलीप सिंह, अमेठी। Amethi Lok Sabha Result 2024 - आम चुनाव 2024 में कांग्रेस या कहें राहुल-प्रियंका के ‘हाथ’ को अमेठी की जनता का साथ मिल गया। मात्र 17 दिन में उनके उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा ने जीत का एक नया इतिहास रच दिया। यह इसका भी प्रमाण है कि जनता जब साथ देने पर आती है तो कोई भी ताकत उसके फैसले को बदल नहीं पाती है।
कुछ इस तरह बदला अमेठी का समीकरण
आम चुनाव 2019 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 मतों से हराकर संसद पहुंचीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आम चुनाव 2024 के रण में भाजपा ने अपनी पहली लिस्ट में दो मार्च को उतार दिया था। वह तब से अमेठी आकर डट गईं थीं।
वहीं, कांग्रेस ने किशोरी लाल शर्मा (KL Sharma) को नामांकन के अंतिम दिन तीन मई को मैदान में उतारा। तब ऐसा लगा कि अमेठी का चुनाव एकतरफा स्मृति के पक्ष में चला गया है, मगर ऐसा हुआ नहीं।
17 दिन के चुनाव प्रचार से जीते किशोरी
किशोरी के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मोर्चा संभाला तो राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बाबा नंद के धाम नंदमहर में हुई चुनावी सभा ने एक नया माहौल बनाने का काम किया। मात्र 17 दिन के चुनाव प्रचार से किशोरी ने अमेठी का रण जीत लिया।
स्मृति के पक्ष में सीएम योगी आदित्यनाथ ने दो, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की चुनावी सभाओं का कोई खास असर नहीं पड़ा। वहीं गृह मंत्री अमित शाह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के रोड शो भी कारगर हथियार साबित नहीं हुए।
किशोरी ने लड़ा पहला चुनाव
किशोरी लाल शर्मा गांधी परिवार के बेहद नजदीकी रहे और राजीव गांधी, सोनिया गांधी, कैप्टन सतीश शर्मा और राहुल गांधी का काम देखते रहे हैं। यह उनके जीवन का पहला चुनाव है। आम चुनाव 2019 में भी सपा और बसपा ने कांग्रेस को समर्थन दे रखा था, लेकिन दोनों पार्टियां खुलकर सामने नहीं आई थीं, इस बार सपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता पूरे चुनाव में साथ ही रहे हैं।
अमेठी में पिछले ढाई दशक में पहली बार है जब गांधी परिवार से कोई भी चुनाव मैदान में नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद 1999 में सोनिया गांधी ने यहीं से चुनाव लड़ा था। उसके बाद राहुल गांधी लगातार चार बार अमेठी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे।
पांचों विधायक भाजपा के साथ, संगठन में अंतर्कलह
अमेठी में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। तीन में भाजपा के विधायक थे, लेकिन चुनाव के पहले गौरीगंज और अमेठी से जीते सपा विधायक भी भाजपा के पक्ष में आ गए। इसके चलते आंतरिक रूप से पार्टी में काफी मतभेद हो गए। पार्टी के कई बड़े नेता जबरदस्त भीतरघात में लगे रहे। इसकी कीमत स्मृति को हार के रूप में अमेठी में चुकानी पड़ी।
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