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    'जायस में पैदा हुए थे गुरु गोरखनाथ'

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    Updated: Thu, 12 Feb 2015 01:00 AM (IST)

    चिंतामणि मिश्र,अमेठी: पूरे देश में अलख निरंजन का डंका बजाने वाले गोरक्षा पीठ के संस्थापक गुरु गोरखना

    चिंतामणि मिश्र,अमेठी: पूरे देश में अलख निरंजन का डंका बजाने वाले गोरक्षा पीठ के संस्थापक गुरु गोरखनाथ का जन्म अवध की माटी में ही हुआ था। अमेठी जिले के जिस जायस को सूफी संत मलिक मुहम्मद जायसी के नाम से ख्याति मिली है उसी जायस में गुरु गोरखनाथ का भी जन्म हुआ था। इसके प्रमाण अनेक पुस्तकों और ग्रंथों में मिल चुके हैं।

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    गुरु गोरखनाथ के जायस में होने का प्रमाण गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित महागुरु गोरखनाथ एवं उनकी तपस्थली नामक पुस्तक में ही मिलता है। पुस्तक के अनुसार गुरु गोरखनाथ के जन्मस्थानों में जायस का जिक्र प्रमुखता से किया गया है। गुरु के जन्म को लेकर भी एक कथा प्रचलित है। यह तो सर्वविदित है कि गुरु गोरखनाथ का जन्म सामान्य प्रक्रिया में नहीं हुआ था। जन श्रुतियों की माने तो लगभग छठी शताब्दी में गुरु मत्स्येंद्रनाथ अपनी यात्रा के दौरान जायस कस्बे में रुके थे। यहां पर एक विधवा ब्राह्माणी ने उनकी सेवा की। जाते समय गुरु ने उसे एक भभूति दी और पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया। विधवा उस समय तो गुरु से कुछ नहीं कह सकी, लेकिन बाद में सामाजिक मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए उसने राख को खाने के बजाए बगल लगे गोबर के ढेर के पास फेंक दिया। 12 वर्ष बाद जब गुरु पुन: उस ओर आए तो उन्होंने ब्राह्माणी से उसके पुत्र के बारे में पूछा। जिस पर उसने पूरी बात बताई। गुरु भभूति की महत्ता से परिचित थे। उन्होंने गोबर के ढेर के पास जाकर आवाज लगाई गोरख-गोरख। तभी एक बारह वर्ष का सुंदर बालक प्रकट हो गया। जिसे गुरु अपने साथ ही लेते गए।

    अन्य रचनाओं में भी हुआ जिक्र

    शांतिकुंज की पत्रिका युग निर्माण योजना हो या रायबरेली से प्रकाशित संतो का इतिहास हर जगह पर गुरु गोरखनाथ की जन्मस्थली जायस को बताया गया है। संत साहित्य के शलाका पुरुष व गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा.भगवती प्रसाद सिंह ने भी अपनी पुस्तक गोरख दर्शन में मलिक मुहम्मद जायसी को गुरु गोरखनाथ प्रशस्ति गायक बताया है। जायसी ने अपनी सभी रचनाओं में गुरु महिमा व नाथ संप्रदाय का जिक्र किया है। पदमावत में उन्होंने सीधे लिखा है गुरु सुवा जे पंथ देखावा। इसके अतिरिक्त गुरु गोरखनाथ की कालजयी रचना गोरख बानी में भी प्रारंभिक अवधी के पुट पाए जाते हैं।

    घूमते हैं नाथ संप्रदाय के साधु

    अमेठी व आस-पास के क्षेत्रों में अब भी हाथ में सरंगी लिए नाथ संप्रदाय के साधु दिखाई पड़ जाते हैं। अलख निरंजन का नारा देने वाले इन साधुओं का डेरा भी लगता है। वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश पीयूष बताते हैं कि गुरु गोरखनाथ घुमक्कड़ साधु थे। यूं तो नेपाल से लेकर काठियावाड़ तक उनके पैदा होने का तर्क गढ़ा जाता रहा। लेकिन वे अवध के थे और जायस उनका जन्म स्थल था। यह सत्य अब सामने आ चुका है। वहीं सगरा आश्रम पीठाधीश्वर मौनी स्वामी कहते हैं कि जायस के उत्तर में स्थित टीला ही बाबा की जन्मस्थली रही होगी। बाबा ने यहां बाद में साधना भी की थी। उन्होंने बताया कि इसको विकसित करने की मांग भी कई बार योगी आदित्यनाथ से की गई, लेकिन कुछ खास नहीं हो सका।