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    UP News: फसल बीमा से मालामाल हो रही कंपनी, 3 वर्ष में 96,163 किसानों ने कराया फसल बीमा, 295 को ही मिला मुआवजा

    By Jagran NewsEdited By: riya.pandey
    Updated: Thu, 15 Jun 2023 02:46 PM (IST)

    किसानों के फसलों की क्षतिपूर्ति नामित कंपनियों के नियम-कानून में उलझ कर रह गई है। नहरों के कटान आग से जलने और 40 प्रतिशत से कम हानि वाले किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है जबकि किसान हर सीजन में अपनी फसलों का बीमा कराते हैं।

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    किसानों को नहीं फसल बीमा के नियमों की जानकारी, 96,163 किसानों के बीमा कराने पर 295 को ही मिला मुआवजा

    संवाद सूत्र, अंबेडकरनगर : किसानों के फसलों की क्षतिपूर्ति नामित कंपनियों के नियम-कानून में उलझ कर रह गई है। नहरों के कटान, आग से जलने और 40 प्रतिशत से कम हानि वाले किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है जबकि किसान हर सीजन में अपनी फसलों का बीमा कराते हैं। इसमें किसान क्रेडिट कार्डधारकों से बैंक के माध्यम से प्रीमियम का भुगतान काट लिया जाता है, जिसकी जानकारी तक किसानों को मिलती है।

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    इसके अलावा नामित बीमा कंपनी एग्री कल्चर इंश्योरेंस कंपनी आफ इंडिया का कोई भी कर्मचारी गांवों में किसानों के पास नहीं जाता है। इससे किसानों का योजना के बारे में विधिवत जानकारी भी नहीं मिल पाती है। इसी स्थिति के चलते तीन वर्षों में बीमित किसानों की संख्या 23 हजार से घटकर 16 हजार तक पहुंच गई है।

    जिले में प्रतिवर्ष आग से सैकड़ों हेक्टेयर गेहूं की फसल को नुकसान

    किसान फसलों की बीमा इसलिए कराता है कि किसी भी प्रकार की आपदा आने पर उसकी क्षतिपूर्ति मिलेगी लेकिन जिले में नामित कंपनी के कर्मचारी सिर्फ प्रीमियम जमा कराने तक ही समिति है। बीमा कंपनी के 40 प्रतिशत से अधिक प्राकृतिक आपदा से हानि होने पर ही लाभ देने का प्रावधान है जबकि जिले में प्रतिवर्ष आग से सैकड़ों हेक्टेयर गेहूं की फसल जलकर राख हो जाती है। नहर विभाग की लापरवाही से गेहूं की फसलें डूब जाती है। इन सभी का मुआवजा किसानों को नहीं दिया जाता है।

    किसानों ने बताई समस्या

    अकबरपुर के न्योतरिया गांव निवासी अमरजीत वर्मा ने बताया कि हर साल नहर कटने से सैकड़ों बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो जाती है और इस साल भी यही घटना हुई लेकिन यहां पर बीमा के नाम पर शोषण किया जा रहा है। टांडा के उदयराज वर्मा, शिव प्रसाद, बेवाना के शेष कुमार आदि ने बीमा कंपनी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अभयराज वर्मा ने बताया कि 25 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक मुआवजा मिला है।

    यह है फसल बीमा की स्थिति

    वर्ष 2020 के खरीफ में 24,120 कृषक फसल बीमित हुए... इसमें 39 को लाभ मिला। वर्ष 2020-21 में रबी सीजन में 18,508 किसानों ने बीमा कराया। इसमें पांच किसानों ने क्षतिपूर्ति की मांग की लेकिन सभी शेष आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। खरीफ में 19,169 किसानों ने फसल बीमा लिया, इसमें 955 गैर ऋणी शामिल हुए। 255 किसानों को लाभ मिला। वर्ष 2022 में रबी फसल में 16,590 किसानों ने बीमा लिया, इसमें 956 गैर ऋणी शामिल हुए। इसमें तीन किसान ने क्षतिपूर्ति की मांग किया लेकिन लाभ एक किसान को मिला। खरीफ सीजन में 17,776 किसान फसल बीमा कराए। इसमें 1,112 गैर ऋणी किसान शामिल है। इसमें 10 किसानों ने मांग की और सभी आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। इस आंकड़े से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वयं किसान कितनी कम संख्या में अपनी फसलों का बीमा करा रहा है। वहीं जो भी सरकारी ऋण लिए है उन कृषकों के फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से कर दिया जाता है।

    प्रभारी उप कृषि निदेशक पीयूष राय के अनुसार, कृषि विभाग, राजस्व और बीमा कंपनी के कर्मचारी सर्वे के बाद ही आंकलन कर क्षतिपूर्ति दी जाती है। कंपनी प्रचार-प्रसार किसानों तक नहीं रहा है इस पर कार्रवाई की जाएगी। किसानों को बिना बताए प्रीमियम कटता है तो कृषि भवन में शिकायत करें।