प्रयागराज, जेएनएन। लोकतंत्र का पर्व हर किसी के लिए है। इसमें जितनी सहभागिता बढ़ेगी पर्व का रंग उतना चटख होगा। खास यह कि तभी हमारी सरकार बनेगी। आज हम उन चेहरों को लेकर आए हैं जो शतायु हो चुके हैं। उन्हें जब से मतदान का अधिकार मिला वह निरंतर उस अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। कह सकते हैं यह सभी अपने मतदान से सरकार बनाने में सहभागिता तो करते ही हैं, साथ ही लोकतंत्र का पाठ भी पढ़ा रहे हैं। आइए जानिए क्या कहते हैं मतदान के लिए तत्पर ये बुजुर्ग।

प्रत्येक चुनाव में मतदान करते हैं। कोशिश होती है कि बूथ पर भीड़ बढ़ने से पहले अपना वोट डाल आएं। इस बार भी वोट डालने जरूर जाएंगे। यह मौका रोज नहीं आता, पांच साल बाद आता है।

- अनारकली मिश्रा, शिवकुटी, बूथ संख्या 53

पहले लोग प्रचार करने आते थे, घर घर लोगों से मिलते थे। कुछ जगहों पर रुककर जलपान भी करते थे। हम सब में मतदान को लेकर उत्साह रहता था। वोट वाले दिन मानो कोई त्योहार हो। हम तो सुबह ही घर से निकल जाते थे। वोट डालने के बाद पूरा दिन चर्चा में गुजरता था।

- राम लखन जयसवाल, शिवकुटी, बूथ संख्या 54

पहले अकेली ही मतदान के लिए बूथ तक जाते थे। अब चलने फिरने में परेशानी होती है तो परिवार के वाले ले जाते हैं लेकिन हर साल मतदान करते हैं। भीड़ बढ़ने से पहले ही बूथ पर पहुंच जाते हैं। वोट वाले दिन घर में भी दिन भर चुनाव की ही चर्चा होती है।

-प्रेमा पुरी, भिक्षुक कर्मशाला

पहले जब चुनाव आता था तो घर घर लोग बिल्ला और पोस्टर बांटने आते थे। वोट के दिन तक नेता पैर भी छूते थे। मतदान के दिन कुछ लोग वोट डलवाने के लिए भी बूथ तक ले चलते थे। अब तो घर पर कोई नहीं आता लेकिन वोट डालने हम जरूर जाते हैं।

- फूलमती तिवारी, बूथ संख्या 53, शिवकुटी

चुनाव का हल्ला पहले खूब सुनाई देता था। वोट डालने कैसे जाना है, कौन सा कपड़ा पहनना है यह भी तय हो जाता था। सुबह शाम नेता और उनके समर्थक घर पर भी आते थे। अब तो सब बदल गया। पर वोट डालने हम जरूर जाते हैं। इस बार भी जाएगे।

-विष्णु देवी, शिव कचहरी

मतदान को लेकर हमेशा उत्साह रहा है। एक बार भी ऐसा नहीं हुआ जब चुनाव में वोट न डाला हो। इस बार भी वोट डालने जरूर जाएंगे। हम तो परिवार के सब लोगों को साथ लेकर ही वोट डालने जाते हैं।

- पुष्पा मिश्रा, गंगानगर बूथ संख्या 182

Edited By: Ankur Tripathi