प्रयागराज, जागरण संवाददाता। गरीब महिलाओं को स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाने पर शासन का जोर है। ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं अपना रोजगार शुरू करने के लिए आगे आ रही हैं। और अब महिलाएं उन कारोबार में भी हाथ आजमा रही हैं जिन्हें कहा जाता था कि पुरुष ही कर पाते हैं। प्रतापगढ़ में समूह की महिलाओं ने मुर्गी पालन करने की ठानी और पोल्ट्री फार्म खोल लिया। अब आलम यह है कि समूह की महिलाएं अपनी मेहनत के दम पर बड़े पैमाने पर यह काम कर रहीं हैं। रोज एक हजार से ज्यादा मुर्गी के अंडे की बिक्री कर रहीं हैं। इससे जुड़कर अन्य महिलाओं का रोजगार में नियोजन हो रहा है। उनकी व परिवार की जिंदगी संवर रही है।

आय का नहीं था कोई जरिया, मुश्किल हो गया था गुजारा

लालगंज ब्लाक के लालूपुर गांव की उर्मिला देवी गरीब परिवार से थीं। आय का कोई जरिया नहीं था। बच्चों की पढ़ाई आदि का खर्च अधिक होने व आय का जरिया न होने की चिंता थी। साल भर पहले वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। कौन सा कारोबार शुरू करूं, यह सोचते-सोचते दो माह से अधिक का समय बीत गया। ऐसे में उन्होंने जिला मिशन प्रबंधक ज्योतिमा कश्यप की सलाह पर पोल्ट्री फार्म का कारोबार शुरू किया। पहले फार्म पर 500 मुर्गी से शुरुआत की, लेकिन जब पांच से छह माह में अच्छी आय होने लगी तो वह इसकी संख्या बढ़ा दी। अब तो फार्म पर दो हजार से अधिक मुर्गियां हैं। रोजाना पांच हजार रुपये से अधिक का अंडा वह बेच रहीं हैं। मुर्गियों का आहार आदि का खर्च काटने के बाद हर माह 15 से 20 हजार रुपये की आय हो रही है। खास बात यह है कि उन्होंने गांव की देवकली, अनारकली, द्रोपदी सहित कुछ अन्य महिलाओं को रोजगार दे रखीं हैं। जिला मिशन प्रबंधक ज्योतिमा कश्यप ने बताया कि उर्मिला ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अपनी मेहनत के दम पर पोल्ट्री फार्म का बड़ा कारोबार शुरू किया है। इससे उनकी अच्छी खासी आय हो रही है।

बड़ा फार्म खोलने की तैयारी

उर्मिला ने फार्म खोलने के लिए सितंबर माह में एक लाख रुपये समूह से ऋण के तौर पर लिया था। उन्होंने फार्म का कारोबार शुरू किया तो महज दो माह के भीतर ही उन्होंने ऋण के रूप में लिया पैसा वापस कर दिया। अब वह बड़ा फार्म खोलने की तैयारी में हैं। उसका संचालन बेरोजगार पति से कराएंगी।

पास के बाजारों में बिक रहा अंडा

मुर्गियों के अंडे की मांग रानीगंज कैथोला, लालगंज सहित बाजारों में अधिक मांग है। अंडा विक्रेता चार से पांच रुपये पीस के हिसाब से यहां से खरीदते हैं जबकि उसे सात से आठ की दर पर बेचते हैं।

Edited By: Ankur Tripathi