प्रयागराज, जेएनएन। आवागमन की सुविधा के लिए देश की आजादी के पूर्व प्रयागराज में नदियों पर कई पुल बनाए गए जिनसे सड़क और रेल यातायात होता है। सैकड़ों साल से चट्टान की तरह खड़े यह पुल आज भी यातायात की रीढ़ बने हुए हैं। इन्हीं में शामिल है दारागंज और झूंसी के बीच बना रेलवे का पुल। गंगा नदी पर बना यह पुल वर्तमान में भी प्रयागराज-वाराणसी के बीच रेल यातायात का संवाहक बना हुआ है।


सौ साल से वाराणसी-प्रयागराज के बीच रेल यातायात की कड़ी
देश की आजादी के पूर्व 1912 में बंगाल नार्थ वेस्टर्न रेलवे द्वारा प्रयागराज-वाराणसी के बीच छोटी लाइन यानी मीटर गेज बिछाने का काम शुरू किया गया, तभी प्रयागराज के दारागंज में गंगा नदी पर एक रेलवे पुल भी बनाया गया जिससे दोनों शहरों के बीच रेलवे यातायात सुचारू हो सके। तकरीबन 109 साल हो चुके लेकिन पुल अभी भी फौलाद की तरह खड़ा है व अपने मजबूत कांधों पर टे्रनों का आवागमन संभाले है।

एक मील से भी अधिक लंबा है गंगा नदी पर बना यह रेलवे पुल  
वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे के प्रबंध क्षेत्र में आने वाला यह पुल 9380 फिट यानी एक मील से भी अधिक लंबा है। ठोस लोहे का बना यह पुल 45 पिलरों पर टिका हुआ है। जिनकी ऊंचाई धरातल से 60 फिट है और जमीन के नीचे तकरीबन 75 फिट तक गई हैं।

31 अक्टूबर 1912 को शुरू हुआ था पुल से टे्रनों का संचालन
पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार के मुताबिक उस समय आइजेट साहब रेलवे के चीफ इंजीनियर थे, उन्हीं के मार्गदर्शन में इस पुल का निर्माण हुआ था इसलिए पुल का नामकरण आइजेट ब्रिज हो गया। इस पुल से रेलवे यातायात 31 अक्टूबर 1912 को शुरू हुआ था। बताते हैं कि उस दौर में पुल के निर्माण पर 30 लाख रुपये व्यय हुए थे।

प्रयागराज-वाराणसी मार्ग पर बनेगा टू लेन का नया रेलवे पुल
वाराणसी से प्रयागराज के बीच टै्रक का दोहरीकरण किया जा रहा है। दारागंज का पुराना रेलवे पुल सिंगल है। ऐसे में गंगा नदी पर वाराणसी रूट पर नया रेलवे पुल बनाया जाएगा। हाल ही में दोहरे टै्रक के इस पुल के लिए मिट्टी परीक्षण का काम भी शुरू हो गया है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के प्रोजेक्ट मैनेजर वीके अग्रवाल के मुताबिक यह पुल पुराने रेलवे पुल और शास्त्री पुल के बीच बनेगा। तकरीबन 17 सौ मीटर लंबे पुल को 25 मजबूत पिलर सहारा देंगे। निर्माण ढाई से तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा।