प्रयागराज, जागरण संवाददाता। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (इविवि) के छात्रों से बिजली बिल जमा करने के लिए जुर्माने वसूली का विरोध शुरू हो गया है। छात्रसंघ बहाली के लिए अनशनरत छात्रों ने इविवि प्रशासन के इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया।

पांच हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से वसूली का फैसला

विश्वविद्यालय के हास्टलों पर कुल सात करोड़ 55 लाख से 23 हजार 907 रुपये बिजली का बिल बकाया है। इस बाबत शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि नवंबर 2020 में हास्टल बंद किए जाने की नोटिस के बावजूद हास्टलों में रहने वाले सभी छात्रों से अब पांच हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माना नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा प्रवेश पत्र निर्गत करने पर रोक लगाते हुए परीक्षा में शामिल होने पर पाबंदी लगा दी जाएगी। इसके अलावा परीक्षा परिणाम, मार्कशीट एवं संबंधित विषय की डिग्री भी रोक दी जाएगी। इसके विरोध में छात्रनेता अजय यादव सम्राट की अगुवाई में छात्रों ने प्रदर्शन किया। अनशनकारियों ने कहा कि जब छात्र छात्रावास में निवास करते हैं तो एक निश्चित निर्धारित बिजली का बिल भी जमा करते हैं।

जब दो साल से हास्टल में नहीं तो कैसा बिजली बिल

पिछले दो वर्षों से कोरोना के चलते छात्र छात्रावास में निवास ही नहीं कर रहे हैं तो बिजली खर्च का सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में पहला सवाल यह उठता है कि बिजली बिल 7.55 करोड़ रुपए बकाया क्यों हुए। स्पष्ट रूप से इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से ली गई बिजली बिल को जमा नहीं कर रहा था, जिससे कि इतना बकाया हो गया। इसकी जवाबदेही इविवि प्रशासन की है। प्रस्ताव पारित किया गया कि बकाया बिजली का बिल अंतेवासी नहीं जमा करेंगे इसके लिए चाहे सड़क से संसद तक संघर्ष करना पड़े। इस दौरान हरेन्द्र यादव, मुबाशिर हारून, नवनीत यादव, अशीष आर्या, यशवंत यादव, मसूद अंसारी, राहुल पटेल, अभिषेक यादव, आयुष प्रिदर्शी आदि लोग उपस्थित रहे।

Edited By: Ankur Tripathi