दबंग छात्रनेता अच्युतानंद ने ही दिया था अपनी मौत का सामान
इविवि समेत अन्य कॉलेजों के सभी छात्र जानते हैं कि आशुतोष त्रिपाठी का दाखिला, उसे रहने की जगह अच्युतानंद ने ही दिलाई थी।
प्रयागराज : दबंग छात्रनेता सुमित शुक्ला उर्फ अच्युतानंद ने अपनी मौत का सामान खुद ही करीबी छात्रनेता आशुतोष त्रिपाठी को सौंपा था। दरअसल, तीन दिन पहले आशुतोष को एक मंत्री से मिलने जाना था। इसके लिए अच्युतानंद शुक्ला ने उसे अपनी फारच्यूनर दी। कुछ रुपये दिए। आशुतोष ने बोला, भैया मेरे पास कोई असलहा नहीं है। ऐसे में अच्युतानंद ने आशुतोष को बुलाकर एक पिस्टल दी। उसने आशुतोष से पूछा, दाना है। इन्कार करने पर अच्युतानंद ने अपनी पिस्टल से पांच कारतूस निकाल कर दिए। तब अच्युतानंद को नहीं पता था कि इसी गोली से उसकी जान जाएगी। अच्युतानंद और आशुतोष के बीच हुए इस लेनदेन के दौरान कई छात्र मौजूद थे। उसकी हत्या के बाद छात्रों की जुबान पर यही बातें रहीं।
यूं तो अच्युतानंद की दर्जनों लोगों से दुश्मनी थी। वह खासा अलर्ट भी रहता था। हर कोई यह सोचकर हतप्रभ है कि उसका सबसे करीबी छात्रनेता ही जिंदगी छीन लेगा। इविवि समेत अन्य कॉलेजों के सभी छात्र जानते हैं कि आशुतोष त्रिपाठी का दाखिला, उसे रहने की जगह अच्युतानंद ने ही दिलाई थी। उसे सीएमपी में चुनाव ही नहीं लड़ाया बल्कि अपनी पूरी ताकत झोंक आशुतोष को अध्यक्ष बनवाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों के बीच रार की जो वजह सामने आ रही है कि उसमें दो छात्रों का नाम आ रहा है। हरिकेश मिश्र आशुतोष त्रिपाठी का बहुत ही करीबी है। जबकि छात्र आलोक चौबे अच्युतानंद का दाहिना हाथ कहलाता था। बताते हैं कि आलोक चौबे और हरिकेश मिश्र के बीच झगड़ा हुआ था। आलोक चौबे ने अच्युतानंद के नाम पर धमकी दी थी, उसने आशुतोष को भी उलट सीधा कहा था। बाद में आलोक ने अच्युतानंद शुक्ला से शिकायत की थी। इस पर अच्युतानंद ने आशुतोष को डांटा था। साथ ही हरिकेश मिश्र को हद में रहने की हिदायत दी थी। दोनों के बीच रार इसी से हुई। सामने तो आशुतोष कुछ नहीं बोल पाया लेकिन अंदर ही अंदर वह हरिकेश के पक्ष में खुलकर था। हत्या में आशुतोष के साथ ही हरिकेश को भी नामजद किया गया है। मूल रूप से बलरामपुर के रहने वाले आशुतोष त्रिपाठी को अच्युतानंद ने ही हॉस्टल दिलवाया था। लखनऊ में आशीष मिश्र हत्याकांड से फैलाई थी सनसनी :
प्रयागराज : मारे गए छात्रनेता अच्युतानंद पर एक दर्जन से अधिक गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। आठ मुकदमे तो कर्नलगंज थाने में ही हैं। इसके अलावा शिवकुटी, सिविल लाइंस, लखनऊ और गोंडा में कई मामले हैं। पांच साल पहले लखनऊ के गोमती नगर में अच्युतानंद शुक्ला ने आशीष मिश्र की हत्या कर सनसनी फैला दी थी। झूंसी के रहने वाले आशीष मिश्र को गोलियों से छलनी किया गया था। हत्याकांड में उसके साथ आशीष उर्फ मोगली और अनुज भी फंसे थे। वर्ष 2013 में अच्युतानंद ने दबंगई दिखाते हुए शिवकुटी थाना प्रभारी रहे वीके सिंह पर फाय¨रग कर सनसनी फैला दी थी। बालू खनन और ठेकेदारी में जमा लिए थे पांव :
प्रयागराज : अच्युतानंद शुक्ला ने जिस तरह से छात्र राजनीति में दखल बढ़ाया उसी प्रकार अपराधिक मामलों में भी वह उलझता गया। दबंगई के बल पर उसने बालू खनन और ठेकेदारी में पांच पसार दिए थे। बताते हैं कि बांदा में बालू खनन के लिए दो घाट उसने लिए थे। इसी प्रकार मेजा में भी एक घाट उसके पास था। ठेकेदारी में दखल दे वह अपने लोगों को काम दिला रहा था।
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