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    Shilp Mela: बस दो दिन और, NCZCC में सजेगा शानदार शिल्प मेला, खानपान के साथ लीजिए खरीदारी और लोकनृत्य का आनंद

    By Jagran NewsEdited By: Ankur Tripathi
    Updated: Tue, 29 Nov 2022 12:12 PM (IST)

    एनसीजेडसीसी (NCZCC) में एक से 12 दिसंबर तक राष्ट्रीय शिल्प मेले का आयोजन होने जा रहा है। इसमें सभी कपड़े सजावटी सामानों के बजार खाने के आइटम अपने आप में खास होंगे तो मुक्ताकाशी मंच पर शाम को होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों में बाहर के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

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    एनसीजेडसीसी (NCZCC) में एक से 12 दिसंबर तक राष्ट्रीय शिल्प मेले का आयोजन होने जा रहा है।

    प्रयागराज, जागरण संवाददाता। Shilp Mela in NCZCC: अगर आप सांस्कृतिक आयोजनों में रुचि रखते हैं और विभिन्न राज्यों के आंचलिक व्यंजनों, पहनावे तथा वहां की लोक कलाओं के बारे में जानने को उत्सुक हैं तो बस दो दिन और इंतजार करिये। आपके अपने शहर प्रयागराज में इन सभी का अनूठा संगम होने जा रहा है। एनसीजेडसीसी (उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र) के शिल्प हाट में संस्कृति का यह संगम देखने को मिलेगा जहां पूरब से लेकर पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक के शिल्पी, लोक कलाकार, लजीज पकवान बनाने के उस्ताद और लकड़ी के सजावटी व घरेलू उपयोग की सामग्री लेकर आने वाले कारीगरों का जमावड़ा होगा।

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    एक से 12 दिसंबर तक लगा रहेगा यह मेला

    एनसीजेडसीसी (NCZCC) में एक से 12 दिसंबर तक राष्ट्रीय शिल्प मेले का आयोजन होने जा रहा है। इसमें सभी कपड़े सजावटी सामानों के बजार, खाने के आइटम अपने आप में खास होंगे तो मुक्ताकाशी मंच पर शाम को होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों में बाहर के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें पहले दिन खास होंगी यू-ट्यूबर और भोजपुरी गायिका मैथिली ठाकुर। एनसीजेडसीसी इस बार मैथिली से ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत कराने जा रहा है।

    इनके अलावा पहले दिन दरभंगा बिहार के विपिन मिश्रा द्वारा ऋचा पाठ और शंख वादन होगा। भावनगर गुजरात से चेतन सुखदेव भाई चौहान और उनके दल द्वारा डांडिया एवं गरबा लोकनृत्य की प्रस्तुति होगी। मणिपुर के वाई अमसुसाना सिंह व दल द्वारा ढोल चोलम और मार्शल आर्ट का प्रदर्शन होगा। पटियाला पंजाब के रवि किन्नुर व उनके दल द्वारा भांगड़ा और जिंदुआ की प्रस्तुति की जाएगी। दो से 12 दिसंबर तक राजस्थान, नई दिल्ली, लखनऊ, रामपुर उप्र, सिक्किम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, रांची झारखंड, उज्जैन मप्र, हरियाणा, उत्तराखंड, कर्नाटक, वाराणसी, बिहार, त्रिपुरा, उड़ीसा के विभिन्न कलाकार दल अपनी आंचलिक लोक कलाओं की प्रस्तुति संगीतमय वातावरण बनाते हुए करेंगे।

    जानिए क्या है खास-खास

    शिल्प मेले के सांस्कृतिक आयोजनों में मैदानी कलाकार भी आएंगे। इसमें दौसा राजस्थान के समशाद अहमद अपने दल के साथ बहरूपिया की प्रस्तुति करेंगे। फरीदाबाद हरियाणा के पाली नाथ अपने दल के साथ बीन वादन करेंगे। अलवर राजस्थान के महमूद अहमद अपने दल के साथ भपंग वादन करेंगे और सबसे प्रमुख होगा कच्ची घोड़ी डांस जिसे प्रस्तुत कर सभी को लुभाने आएंगे बूंदी राजस्थान के हरिशंकर नागर व उनकी साथी कलाकार।

    स्थानीय कलाकारों को नहीं मिलेगा अवसर

    राष्ट्रीय शिल्प मेले में इस बार सांस्कृतिक आयोजनों की प्रस्तुति के लिए स्थानीय कलाकारों को मौका नहीं मिलेगा। सभी कलाकार उप्र के विभिन्न अन्य जिलों व दूसरे राज्यों के रहेंगे। एनसीजेडसीसी प्रबंधन का तर्क है कि दीपावली शिल्प मेले में स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा चुका है।

    एनसीजेडसीसी के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा कहते हैं कि राष्ट्रीय शिल्प मेले को इस बार सांस्कृतिक आयोजनों की दृष्टि से कुछ खास बनाने की कोशिश होगी। कई नए कलाकार दलों को आमंत्रित किया गया है। वस्त्रों और व्यंजनों में भी ऐसे लोग आ रहे हैं जिनसे यहां के लोगों को कुछ नयापन मिलेगा।