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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सर्पदंश से मौत पर मिलेगा 400000 रुपये मुआवजा, इन शर्तों को पूरा कर ले सकेंगे सरकारी मदद

By Brijesh SrivastavaEdited By:
Published: Sun, 11 Jul 2021 02:01 PM (IST)Updated: Sun, 11 Jul 2021 02:04 PM (IST)

प्रदेश सरकार ने अब सर्प दंश से हुई मृत्यु को आपदा की श्रेणी में माना है। इसलिए इससे होने वाली ...और पढ़ें

सर्पदंश से मरने वाले के आश्रितों को आर्थिक सहायता के लिए सात दिन में जिला प्रशासन को जानकारी देनी होगी।
सर्पदंश से मरने वाले के आश्रितों को आर्थिक सहायता के लिए सात दिन में जिला प्रशासन को जानकारी देनी होगी।

प्रयागराज, जेएनएन। सर्पदंश से मौत होने पर उनके स्वजनों को चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। उत्‍तर प्रदेश की योगी आदित्‍यनाथ की सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन जारी कर दी है। इस योजना का लाभ पाने के लिए कुछ शर्तें भी पूरी करनी होगी। सर्पदंश से मौत की पुष्टि के लिए शव का पोस्मार्टम कराना जरूरी होगा। साथ ही मौत के सात दिन के भीतर मुआवजा के लिए आवेदन भी करना होगा। 

प्रदेश सरकार ने सर्पदंश को आपदा की श्रेणी में माना

बारिश के दिनों में सर्प दंश की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। ऐसी घटनाएं अधिकतर गांव में होती है। पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में सर्प दंश से कई किसानों और उनके स्वजनों की मौत हुई। सर्प दंश से हुई असमय मौत, किसानों को गहरा जख्त दे जा रही है। प्रदेश सरकार ने अब सर्प दंश से हुई मृत्यु को आपदा की श्रेणी में माना है। इसलिए इससे होने वाली मौत पर उसके स्वजनों को चार लाख रुपये मुआवजा देेने प्रावधान किया गया है।

एडीएम वित्‍त एवं राजस्‍व बोले- शव का पंचनामा या पोस्‍टमार्टम जरूरी

एडीएम वित्त एवं राजस्व एमपी सिंह ने बताया कि पिछले दिनों प्रदेश सरकार से इसका आदेश आया है। आदेश मिलते ही उसका पालन शुरू हो गया है। इसके लिए सभी लेखपालों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि सर्प दंश से मौत हो तो शव का पंचनामा या पोस्टमार्टम कराया जाना अनिवार्य है। पोस्टमार्टम के बाद मृतक की बिसरा रिपोर्ट प्रिजर्व करने की जरूरत नहीं है।

सात दिन के अंदर जिला प्रशासन को देनी होगी सूचना

एडीएम वित्त एवं राजस्व ने कहा कि मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता के लिए सात दिन के भीतर जिला प्रशासन को जानकारी देनी होगी। वह क्षेत्रीय लेखपाल या एसडीएम कार्यालय में इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। फिर इसकी जांच करवाकर आर्थिक सहायता की धनराशि पीडि़त के खाते में भेज दी जाएगी। इस योजना के शुरू होने से किसानों को राहत मिलेगी।