प्रयागराज, जेएनएन। बदलती हाइटेक दुनिया में 'रेडियो अंकल' हम सभी के बीच से गुम हो गए हैं। हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन और लैपटाप है। नई पीढ़ी अपनी जरूरत के अनुसार यू ट्यूब और 'गूगल बाबा' की शरण में चली जाती है। शायद यही कारण है कि आज के बच्चे रेडियो से अनभिज्ञ हैं। बावजूद इसके आकाशवाणी की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि लोग रेडियो के साथ-साथ आकाशवाणी से जुड़े रहें।

युवा वर्ग रेडियो की अहमियत समझता था
एक समय वह था जब आकाशवाणी का कार्यक्रम प्रसारित होता था तो लोग रेडियो के पास पहुंच जाते थे। हर घर में एक या दो रेडियो हुआ करता था। खासतौर से युवा वर्ग इसकी अहमियत तब समझता था जब मैच का प्रसारण होता था। वहीं अंग्रेजी या हिंदी समाचारों के प्रसारण को सुनकर लोग देश और विदेश की खबरों की जानकारी लेते थे। अब ऐसा नहीं है। रेडियो घर की चौखट से ही नहीं बल्कि समाज से भी दूर हो गया। अब सब कुछ स्मार्टफोन में ही उपलब्ध है जो सभी हाथों में है लेकिन रेडियो तो गिने चुने लोगों के पास ही बचा होगा।

आकाशवाणी के प्रमुख कार्यक्रम
आकाशवाणी की तरफ से कई कार्यक्रम प्रसारित होते हैं जो कहीं न कहीं हर वर्ग को जोड़ते हैं। किसानों के लिए पंचायत घर, ग्रामीण महिलाओं के लिए पनघट तो शहरी महिलाओं के लिए गृहलक्ष्मी कार्यक्रम आयोजित होता है। युवाओं के लिए युगवाणी, वृद्धों के लिए अक्षयवट, बच्चों के लिए बालसंघ, छोटे बच्चों के लिए बाल चौपाल व नन्हीं दुनिया कार्यक्रम प्रमुख हैं। सेहत की बात करें तो 'स्वास्थ्य चर्चा' व परिवार कल्याण का प्रसारण व कानून संबंधी जानकारी के लिए 'कानून और हम' कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।

बोले आकाशवाणी के कार्यक्रम संचालक
आकाशवाणी के कार्यक्रम संचालक विनय श्रीवास्तव की मानें तो रेडियो का प्रचलन कम हुआ है। हालांकि शहरों की अपेक्षा गांवों में रेडियो के श्रोता अधिक हैं। कहा कि आकाशवाणी हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ कार्यक्रम प्रसारित करता है।

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