Saraswati magazine : प्रयागराज से 40 साल बाद फिर निकली 'सरस्वती की साहित्य धारा'
Saraswati magazine 120 वर्ष पहले 1900 में सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया था। जून 1980 में प्रकाशन बंद हो गया था। जल्द ही सरस्वती पत्रिका फिर से हमारे बीच होगी। इसी पखवाड़े अक्टूबर नवंबर व दिसंबर के अंक का विधिवत लोकार्पण कराए जाने की योजना है।
प्रयागराज [शरद द्विवेदी] । अंग्रेजी हुकूमत में तमाम बंदिशों के बीच हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास की पठकथा लिखने वाली सरस्वती पत्रिका फिर से हमारे बीच होगी। 40 साल पहले बंद हुई सरस्वती में पहली बार विदेशी लेखकों को भी शामिल किया गया है। गौरवपूर्ण अतीत को संजोने वाली पत्रिका का त्रैमासिक प्रकाशन इंडियन प्रेस से किया जाएगा। इसी पखवाड़े अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर के अंक का विधिवत लोकार्पण कराए जाने की योजना है।
गुलामी की बेडियों में जकड़े भारत को भाषिक व सांस्कृतिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए 120 वर्ष पहले 1900 में सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया गया था। जून 1980 में आर्थिक कारणों से पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया था। इंडियन प्रेस के कर्ताधर्ता एसपी घोष और सुप्रतीक घोष ने बताया कि पत्रिका के संपादक के रूप में डॉ. देवेंद्र शुक्ल तथा सह संपादक साहित्यकार अनुपम परिहार हैं। अनुपम परिहार का कहना है कि शीघ्र ही पत्रिका हमारे बीच में होगी।
तीन खंडों में मुद्रित है पत्रिका
इस बार पत्रिका 330 पेज की तीन खंडों में प्रकाशित है। प्रथम खंड में संपादकीय, धरोहर के तहत लेख पुराने छपे हैं। जबकि द्वितीय खंड आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को समर्पित है। इसमें उनसे जुड़े लेख प्रकाशित किए गए हैं। तृतीय खंड समकालीन लेख, कविताएं व नवगीत प्रकाशित है। इसमें साहित्य के साथ कला को भी स्थान दिया गया है। प्रख्यात कथक नर्तक बिरजू महाराज का साक्षात्कार भी प्रकाशित है। वहीं, रंगमंच, फिल्म व कला पर लेख को स्थान मिला है।
स्वर्गवासी रचनाकारों को नमन
संस्मरण कॉलम स्वर्गवासी हो चुके रचनाकारों को समर्पित है। कथाकार स्व. दूधनाथ सिंह, स्व. डॉ. नामवर सिंह व स्व. नीलाभ 'अश्क' को समर्पित लेख प्रकाशित है।
पाकिस्तान के व्यंग्यकार मुश्ताक की रचना भी शामिल
'विदेशी कलम' शीर्षक में पाकिस्तानी व्यंगकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की रचना शामिल की है। प्रवासी लेख में मॉरीशस से वीरसेन जागा सिंह का आलेख, अमेरिका से कविता वाचक्नवी व अनिल प्रभा ठाकुर की कविताएं प्रकाशित हैं।
स्वर्णिम काल था आचार्य महावीर का कार्यकाल
सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन संस्थापक बाबू चिंतामणि घोष ने जनवरी 1900 में आरंभ कराया। इसके संपादक मंडल में श्याम सुंदर दास, किशोरीलाल गोस्वामी, बाबू कार्तिक प्रसाद खत्री, जगन्नाथदास रत्नाकर, बाबू राधाकृष्ण दास थे। पत्रिका का संपादन 1901 में श्यामसुंदर दास को मिला। इन्होंने बिना पारिश्रमिक लिए काम किया। जनवरी 1903 में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने पत्रिका का संपादन शुरू किया। साहित्यकारों के मुताबिक ये पत्रिका का स्वर्णिम काल माना जाता है। आचार्य महावीर ने सरस्वती के जरिए खड़ी बोली को नई ऊचाइयां प्रदान की। फिर 1921 से 1925 तक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, 1927 में पं. देवीदत्त शुक्ल, 1928 में पुन: पदुमलाल पुन्ना बख्शी, 1929 से 1946 तक पं. देवीदत्त शुक्ल संपादक रहे। फिर 1946 में उमेशचंद्र मिश्र व देवीदयाल चतुर्वेदी 'मस्त' संपादक बने। उमेशचंद्र बाद में हट गए और देवीदयाल चतुर्वेदी 1955 तक संपादक रहे। 1956 से 1976 तक श्रीनारायण चतुर्वेदी 'भइया साहब' संपादक थे। जून 1980 में धनाभाव के चलते पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया। उस समय निशीथ राय संपादक थे।
हमारी भाषा हिंदी है
हमारी भाषा हिंदी है। उसके प्रचार के लिए गवर्नमेंट जो कुछ कर रही है, सो तो कर ही रही है, हमें चाहिए कि हम अपने घरों का अज्ञान तिमिर दूर करने और अपना ज्ञानबल बढ़ाने के लिए इस पुण्यकार्य में लग जाएं।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, (1903 में पत्रिका के संपादक)
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