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    Prayagraj Air Pollution: संगम नगरी की जहरीली हुई हवा, 500 के करीब पहुंचा AQI, दिन में भी छाई है धुंध

    By Jagran NewsEdited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Sat, 05 Nov 2022 02:01 PM (IST)

    प्रयागराज में दिल्ली की तरह गाढ़ी धुंध नहीं है लेकिन मौसम पूरी तरह से बदला नजर आ रहा है। गंगा के तराई इलाके तेलियरंगंज और शास्त्री ब्रिज से शहर की ओर देखने पर सिर्फ धुंध दिखाई पड़ रही है। आज सुबह से धूप का असर भी फीका पड़ गया है।

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    प्रयागराज में एयर क्वालिटी इंडेक्स काफी बढ़ गया है। यानी हवा में प्रदूषण बढ़ गया है।

    प्रयागराज, जागरण संवाददाता। प्रयागराज की आबोहवा भी जहरीली हो गई है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 500 के बेहद नजदीक हो गया है। पूरे शहरी क्षेत्र में हल्की धुंध देखने को मिल रही है। धूप का असर भी फीका है। प्रयागराज परिक्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं ना के बराबर होती हैं, लेकिन उसके बावजूद एक्यूआई का बढ़ना चिंताजनक है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर सांस की बीमारी बढ़ेगी। यह स्तर स्वस्थ लोगों को बीमार करेगा। मौजूदा बीमारियों वाले लोग गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।

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    धुंध से धूप भी फीकी : प्रयागराज में दिल्ली की तरह गाढ़ी धुंध नहीं है, लेकिन मौसम पूरी तरह से बदला नजर आ रहा है। गंगा के तराई इलाके, तेलियरंगंज और शास्त्री ब्रिज से शहर की ओर देखने पर सिर्फ धुंध ही दिखाई पड़ रही है। आज सुबह से धूप का असर भी फीका पड़ गया है।

    एक्‍यूआइ बढ़ने से स्‍वास्‍थ्‍य पर प्रतिकूल असर पड़ता है : नगर निगम क्षेत्र में एक्यूआइ 479 पहुंचा गया है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हुई स्थिति है। ऐसे में अब स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार होंगे। जबकि जो लोग पहले से बीमार हैं उनकी समस्या बहुत अधिक बढ़ जाएगी। आश्चर्य की बात है कि सबसे साफ हवा वाला एमएनआईटी क्षेत्र में भी एक्यूआइ 400 के करीब पहुंच गई है। यह क्षेत्र सर्वाधिक शांत और कम एक्यूआइ में गिना जाता है। ऐसे में यह इलाका भी बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है।

    धुंध का प्रमुख कारण धुआं और धूल के कण : शहरी क्षेत्र व शहर से सटे इलाकों में भी धुंध छाई है। गाड़ियों के धुएं और धूल के कण से बढ़ी परेशानी । हवा के जहरीली होने का सबसे प्रमुख कारण मौसम के परिवर्तन के साथ ही धुआं और धूल कण ही माना जा रहा है। शहर में इस समय निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं, सड़कों पर भारी गंदगी है और धूल है। इसके अलावा बड़ी संख्या में वाहन आवागमन कर रहे हैं, जिससे हवा खराब होती जा रही है।

    झूंसी में राहत पर स्थिति खतरनाक : झूंसी की ओर से जाने वाले वाहनों को रूट डायवर्ट के कारण फाफामऊ की ओर से भेजा जा रहा है। इससे शहर के एमएनआइटी की ओर दबाव बढ़ गया और उसका असर हवा पर भी दिखाई पड़ रहा है।

    झूंसी में आज कितना है एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्‍यूआइ) : झूंसी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में लगे यंत्र से शनिवार अधिकतम एक्यूआइ 331 मापा गया। इस क्षेत्र में गुरुवार व शुक्रवार के आस पास ही स्थिति नबी हुई है।जिस स्थिति में झूंसी का क्षेत्र अभी है वह भी बेहद गंभरी समस्या से घिरा है।

    एमएनएनआइटी में आज क्‍या है एक्‍यूआइ की स्थिति : मोती लाल नेहरु राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के एक्यूआइ मापन यंत्र में शनिवार को अधिकतम एक्यूआइ 394 दर्ज किया गया। यह भी खराब स्थिति का प्रदूषण है। इसमें लंबे समय तक रहने पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगेगी। इस रूट पर सर्वाधिक ट्रैफिक है, लेकिन छावनी क्षेत्र समेत पेड़-पौधों की संख्या भी एमएनएनआइटी के आस-पास अधिक है। इससे प्रदूषण का स्तर उतनी तेजी से नहीं बढ़ा, जितना की नगर निगम क्षेत्र में। फिलहाल यहां भी हालात अच्छे नहीं है।

    नगर निगम के प्रदूषण मापक यंत्र का एक्‍यूआइ : नगर निगम में लगे यंत्र में अधिकतम एक्यूआइ 479 मापा गया। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है और लोगों को स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करेगी। फिलहाल तीनों ही स्थान पर लगे यंत्रों से जो रिकार्ड मिले हैं उससे साफ है कि शहर की आबोहवा तेजी के खराब हो रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि हवा खराब होने का प्रमुख कारण वाहनों के धुएं व सड़कों पर उड़ने वाले धूल के कण हैं।