प्रयागराज में पंडित जी की आलू टिक्की, दही बड़ा और खट्टी-मीठी फुलकी के स्वाद का जवाब नहीं
इंडियन प्रेस चौराहे से कर्नलगंज मोहल्ले की तरफ जाने वाली सड़क पर दायीं ओर चौराहे से सटकर एक छोटी सी चाट की दुकान है जहां शाम को काफी भीड़ रहती है। पंडित जी की चाट के नाम से मशहूर इस दुकान पर मिलने वाली चाट के काफी कद्रदान हैं

प्रयागराज, जेएनएन। इंडियन प्रेस चौराहे से कर्नलगंज मोहल्ले की तरफ जाने वाली सड़क पर दायीं ओर चौराहे से सटकर एक छोटी सी चाट की दुकान है जहां शाम को काफी भीड़ रहती है। जी हां, 'पंडित जी की चाट के नाम से मशहूर इस दुकान पर मिलने वाली चाट के काफी कद्रदान हैं जो दूर-दूर से चाट खाने के लिए यहां पहुंचते हैं। पैसे थोड़े से ज्यादा लगते हैं लेकिन बढि़या स्वाद के आगे उन्हें पैसों की चिंता नहीं होती। शाम को महज कुछ घंटों के लिए लगने वाली दुकान पर चाट खाने वालों की काफी भीड़ जुटती है। कुछ लोग वहीं पर खड़े होकर खाते हैं तो तमाम लोग पैक कराकर अपने घर भी ले जाते हैं। लोगों के दो और चार पहिया वाहनों के चलते इस चौराहे के आसपास कई बार जाम की स्थिति बन जाती है।
आसपास तो दुकानें कई लेकिन पहली पसंद पंडित जी की चाट
कर्नलगंज मुहल्ले में बॉलसन और थाने वाले चौराहे से लेकर इंडियन प्रेस चौराहे तक चाट के कई ठेले व दुकानें लगती हैं लेकिन पंडित जी की दुकान पर भीड़ मधुमक्खी की तरह जुटती है। शाम को कंपनीबाग से चहलकदमी कर लौटने वाले और कार्यालय से घर जाने वाले तमाम लोगों की यह दुकान पहली पसंद हैं जहां पर चाट खाने के साथ ही वे घर के लिए भी पैक कराकर ले जाते हैं। एजी आफिस में कार्यरत रजनीकांत विद्यार्थी और जिला पंचायत कार्यालय में कार्यरत उनकी पत्नी शाम को दफ्तर से लौटते समय पंडित जी की चाट खाना नहीं भूलते। बच्चों के लिए भी पैक कराकर ले जाते हैं। उनका कहना है कि आसपास दुकानें तो कई हैं किंतु पंडित जी की चाट का स्वाद ही अलग है जो उन्हें यहां तक खींच लाता है।
थोड़ा महंगा लेकिन स्वाद में बेजोड़ है आलू टिक्की व दही बड़ा
सलोरी के राजू शुक्ला व ओम गायत्री नगर के मदन जी मिश्रा भी पंडित जी की चाट के तलबगार हैं। उनका कहना है कि पंडित जी की चाट आसपास के और चाट वालों के मुकाबले महंगी है लेकिन स्वाद बेजोड़ है। आलू टिक्की कुरकुरी होने के साथ ही खट्टी-मीठी चटनी का स्वाद भी बेहतरीन होता है। दही-बड़ा भी बहुत स्वादिष्ट होता है। बड़ा तो मुंह में डालते ही घुल जाता है, दही के ऊपर मीठी चटनी का स्वाद तो निराला होता है जो काफी देर तक मुंह में बना रहता है। खट्टे और मीठे पानी के अलावा सकौड़ा की ग्रेवी और मीठी चटनी वाली फुलकी भी लाजवाब है। इसी स्वाद के चलते दुकान पर आते हैं।
पंडित भगवती प्रसाद दुबे ने 1945 में शुरू की थी दुकान
दुकान के मालिक आशीष दुबे बताते हैं कि उनकी दुकान पर चाट से लेकर हर सामग्री शुद्ध होती है। तेल से लेकर अन्य सभी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता व साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है जिससे लोग यहां चाट खाना पसंद करते हैं। पहले दुकान कर्नलगंज सब्जी मंडी चौराहे के समीप हमारे घर के सामने चबूतरे पर लगती थी। पांच वर्ष पूर्व 2016 में ही यहां पर आई है। बताया कि तकरीबन 1945 में हमारे बाबा पंडित भगवती प्रसाद दुबे ने इस दुकान को शुरू किया था जिनको लोग पंडित जी कहकर बुलाते थे, उन्हीं के नाम पर दुकान का नाम पड़ा। उनका दो साल पहले देहांत हो गया। बताया कि हमारे यहां आलू की टिक्की 40 रुपये प्लेट, पांच फुल्की 15 रुपये की, दही बड़ा, खस्ता व पालक बैंगन 30 रुपये प्लेट, धनिया मिक्स हरा आलू और सकौड़ा 20 रुपये में मिलता है। दुकान पर अब गुलाब जामुन भी रखने लगे हैं जो 20 रुपये प्रति पीस है। कामकाज में पिता अंजनी दुबे भी सहयोग करते हैं।
अपनी बारी के लिए यहां आने वाले लोग करते हैं इंतजार
पंडित जी की चाट और दही बड़ा लोगों को इतना पसंद है कि अपनी बारी आने के लिए वे आधा-पौन घंटे इंतजार भी कर लेते हैं। शाम को चार बजे के करीब दुकान के खुलते ही लोग आने लगते हैं। कुछ ही देर में भीड़ हो जाती है। एक साथ टिक्की, दही बड़ा के कई आर्डर मिल जाते हैं जिससे उन्हें तैयार करने में कुछ देर लग जाती है। यह तो लोगों का स्नेह है कि वे हमारी चाट पसंद करते हैं व उसके लिए कुछ देर इंतजार भी कर लेते हैं। हिसाब में कोई गड़बड़ी न हो इस नाते हम पैसे पहले ही जमा करा लेते हैं। आशीष बताते हैं कि पहले शादी-समारोहों के लिए भी आर्डर लिए जाते थे लेकिन अभी सब बंद है। कोरोना संक्रमण के चलते भी एहतियात बरत रहे हैं।
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