प्रयागराज, जागरण संवाददाता। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को असमय मौत का आज दूसरा रोज है लेकिन अब भी लोगों को इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है कि महंत ने खुद फांसी लगा ली होगी। वह आत्महत्या कर सकते हैं इस पर किसी को भरोसा नहीं हो रहा इसलिए इस घटना को साजिश करार दिया जा रहा है। संतों के साथ ही समाज के हर वर्ग में शोक की लहर है। नरेंद्र गिरि नहीं रहे, यह मन नहीं मान रहा लोगों का।। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैैं कि यह सब कैसे हो गया। वह कहते हैं कि नरेंद्र गिरि का निधन संत समाज के लिए बड़ी क्षति है। वह धर्म के प्रति समर्पित महात्मा थे। इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

समाधि में रहेंगे हर अखाड़े के महात्मा

महंत हरि गिरि ने बताया कि 2013 में प्रयागराज महाकुंभ के बाद उन्हें (महंत नरेंद्र गिरि) को अखाड़ा परिषद अध्यक्ष चुन लिया गया था। फिर 2014 में त्रयंबकेश्वर में 13 अखाड़ों ने निर्विरोध अध्यक्ष चुना। उन्होंने बताया कि वह जूनागढ़ से निकल चुके हैं और महंत की समाधि में शामिल होंगे। समाधि में हर अखाड़े के महात्मा मौजूद रहेंगे। अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर कहा कि अभी उस पर हमारा ध्यान नहीं है। पहले समाधि हो जाए, उसके तीन दिन बाद अथवा षोडसी (16 दिन बाद) नए अध्यक्ष के बारे में विचार किया जाएगा। टीकरमाफी आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि के निधन से स्तब्ध हूं। वह जीवट व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक जगदगुरु स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि निर्भीक संत थे, वो आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते थे। घटना की जांच सीबीआइ से कराई जाय। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के ब्रह्मलीन होने का समाचार स्तब्ध करने वाला है। उन्होंने अपना जीवन समाज और भगवान बजरंगबली की सेवा को समॢपत किया।

सत्यता को सामने लाने की जरूरत

संतों की सबसे बड़ी संस्था अखाड़ा परिषद के सेनानायक का असमय दुनिया से जाना कष्टकारी है। यह सनातन धर्म को घेरने की कोशिश है। इस घटना की निष्पक्ष जांच करके सत्यता को सामने लाने की जरूरत है।

-जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, सदस्य श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट

बहनों से रखते थे गुरु-शिष्य का रिश्ता

महंत नरेंद्र गिरि की मौत की खबर से प्रतापगढ़ में सोमवार रात पनियारी गांव निवासी भागीरथी सिंहृ के घर मातम छा गया। भागीरथी के साथ उनकी बड़ी बहन उर्मिला का विवाह हुआ है। छोटी बहन मंजू का विवाह इसी क्षेत्र के लीलौली मानधाता में हुआ है। वहां भी शोक की लहर दौड़ गई। बहन व उनके घर के लोग अभी अचला सप्तमी के दिन भंडारे में संगम पर मिले थे। बहनों का कहना है कि संन्यास के बाद वह उनसे गुरु और शिष्य का रिश्ता रखते थे। मुलाकात में हालचाल पूछते थे। भगवान की शरण में पूजा-पाठ करने की शिक्षा देते थे। जब भी अयोध्या के लिए गुजरते तो मिलना नहीं भूलते। उर्मिला मंगलवार सुबह मठ पहुंची और लगातार बिलखतीं रहीं।

Edited By: Ankur Tripathi