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    भर्ती निकाली तो क्यों नहीं भर रहे नलकूप आपरेटर के सभी पद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किया सवाल

    By Ankur TripathiEdited By:
    Updated: Tue, 17 Aug 2021 08:34 PM (IST)

    अदालत ने सही तथ्य पेश नहीं कर गुमराह करने वाले अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार ने भर्ती निकाली तो सारे पद भरे क्यों नहीं भरे जाते? प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों से बचे पदों को भरने की बजाय उन्हेंं हाई कोर्ट आने के लिए विवश करते हैं।

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    लापरवाह अधिकारियों को अदालत ने लगाई फटकार, कहा-नहीं देते मांगी गई सही जानकारी

    प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिंचाई विभाग में 3210 नलकूप आपरेटर भर्ती में खाली बचे पदों को प्रतीक्षा सूची से नहीं भरने के कारणों की 19 अगस्त तक विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने सही तथ्य पेश नहीं कर गुमराह करने वाले अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जब सरकार ने भर्ती निकाली है तो सारे पद भरे क्यों नहीं भरे जाते? प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों से बचे पदों को भरने की बजाय उन्हेंं हाई कोर्ट आने के लिए विवश करते हैं।

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    ऐसे मामले तो हाई कोर्ट में आना ही नहीं चाहिए

    यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने विजय कुमार और 26 अन्य की याचिका पर दिया है। याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने पक्ष रखा। सरकारी वकील ने अधिकारियों की गलती मानी और पूरी जानकारी देने के लिए सुनवाई स्थगित करने की मांग की। कहा गया कि आयोग ने प्रतीक्षा सूची नहीं दी। कोर्ट में विषय से अलग फैसला देकर भ्रमित किया। आयोग की सूची से भर्ती पूरी कर ली गई। इस पर कोर्ट ने फटकार लगाई और कहा कि सरकार ने भर्ती निकाली, पद खाली रह गए तो आयोग से प्रतीक्षा सूची मांगने की बजाय बता दिया कि भर्ती पूरी कर ली गई है। आखिर प्रतीक्षा सूची से खाली बचे पदों पर नियुक्ति क्यों नहीं की गई। ऐसे मामले तो हाई कोर्ट आना ही नहीं चाहिए।

    भर्ती में प्रतीक्षा सूची जारी करने का नियम है

    याची के अधिवक्ता ने कोर्ट में ट्यूबवेल आपरेटर सेवा नियमावली के हवाले से बताया कि भर्ती में प्रतीक्षा सूची जारी करने का नियम है। इसके बावजूद आयोग ने विज्ञापित 3210 अभ्यर्थियों की सूची जारी की। राज्य सरकार ने 19 अगस्त, 2020 के आदेश से कहा कि कोई पद खाली नहीं बचा है और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने 19 अक्टूबर, 2020 को कहा 672 पद भरने से बचे हैं। याची के अधिवक्ता ने कहा बहुत से चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति नहीं ली, भारी संख्या में पद खाली बचे हैैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी कोर्ट का आदेश तक नहीं पढ़ते। पद खाली हैं तो अधिकारियों को आयोग से प्रतीक्षा सूची नहीं मांगनी चाहिए। पद भरने के लिए भर्ती निकाली गई है तो सभी पद भरे जाने चाहिए।