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    Death Anniversary: फिरोज गांधी का प्रयागराज में गुजरा बचपन, यहीं सीखा था राजनीति का ककहरा

    By Ankur TripathiEdited By:
    Updated: Wed, 08 Sep 2021 06:08 PM (IST)

    पुण्यतिथि पर विशेष फिरोज जहांगीर गांधी का जन्म 12 सितंबर 1912 को मुंबई के पारसी परिवार में हुआ था। 1920 में पिता की मृत्यु के बाद फिरोज मां रतिमाई के साथ मुंबई के खेतवाड़ी मोहल्ले के नौरोजी नाटकवाला भवन से प्रयागराज आ गए। वह यहां मौस के पास रहने लगे।

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    फिरोज गांधी अक्सर आनंद भवन जाते थे और उनकी इंदिरा गांधी से नजदीकियां बढऩे लगीं।

    पुण्यतिथि पर विशेष

    जन्म : 12 सितंबर 1912

    निधन : 08 सितंबर 1960

    गुरुदीप त्रिपाठी, प्रयागराज। बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि फिरोज गांधी का बचपन प्रयागराज (पूर्ववर्ती इलाहाबाद) में बीता था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक इविंग क्रिश्चियन कालेज (ईसीसी) स्नातक की पढ़ाई की थी। यही नहीं फिरोज ने राजनीति का ककहरा भी यहीं से सीखा था। वह पिता के निधन के बाद वर्ष 1920 में प्रयागराज आए थे। उस समय उनकी उम्र आठ वर्ष थी। आज बुधवार को फिरोज की पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेता ममफोर्डगंज स्थित पारसी कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।

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    26 मार्च 1942 को इंदिरा गांधी से आनंद भवन में की थी शादी

    इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि फिरोज जहांगीर गांधी का जन्म 12 सितंबर 1912 को मुंबई के पारसी परिवार में हुआ था। 1920 में पिता की मृत्यु के बाद फिरोज अपनी मां रतिमाई के साथ मुंबई के खेतवाड़ी मोहल्ले के नौरोजी नाटकवाला भवन से प्रयागराज आ गए। वह यहां अपनी मौसी शिरिन कमिसारीट के पास रहने लगे। उनकी मौसी शहर के डफरिन अस्पताल में सर्जन थीं। बात 1930 की है जब फिरोज ईसीसी में पढ़ते थे तो कांग्रेस के स्वतंत्रता सेनानियों की तरफ से गठित वानर सेना ने कालेज के बाहर प्रदर्शन किया था। वह पहली बार यहीं पर इंदिरा गांधी और कमला नेहरू से मिले थे। गर्मी की वजह से कमला नेहरू बेहोश हो गईं तो फिरोज ने उनकी मदद की थी। अगले दिन फिरोज ने शिक्षा त्याग कर भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुडऩे का प्रेरणा ले लिया। इसके बाद वह अक्सर आनंद भवन जाते रहे और उनकी इंदिरा से नजदीकियां बढऩे लगीं। 1933 में उन्होंने इंदिरा से शादी की इच्छा जाहिर की तो कमला नेहरू ने मना कर दिया। क्योंकि उस वक्त इंदिरा की उम्र 16 साल थी।

    शादी से खुश नहीं थे नेहरू

    प्रोफेसर तिवारी बताते हैं कि पंडित जवाहर लाल नेहरू इस रिश्ते से खुश नहीं थे। वजह फिरोज पारसी थे और वह कश्मीरी ब्राह्म्ण। दोनों के उम्र में काफी अंतर भी था। बाद में महात्मा गांधी के हस्तक्षेप पर नेहरू माने और 26 मार्च 1942 को आनंद भवन में शादी हुई। इस शादी में महात्मा गांधी भी शामिल हुए थे।

    नैनी जेल में थे फिरोज-इंदिरा

    विवाह के बाद भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इंदिरा और फिरोज एक साथ जेल भी गए थे। दोनों को ही नैनी जेल में बंद किया गया था। अगले पांच वर्षों में राजीव और संजय का जन्म हुआ था। भारत की आजादी के बाद इंदिरा और फिरोज दोनों बच्चों के साथ प्रयागराज में रहने लगे। बाद में वह नेहरू द्वारा स्थापित नेशनल हेराल्ड के निदेशक के तौर पर काम करने लगे।

    आठ सितंबर को हुआ निधन

    1952 और 1957 में फिरोज रायबरेली से चुनाव जीते। 1958 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा फिर वह बीमार रहने लगे। आठ सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियां मम्फोर्डगंज स्थित पारसी कब्रिस्तान में पारसी रीति से दफनाई गई थी।