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जूना अखाड़ा में दलित संन्यासी का पट्टाभिषेक, बनेंगे महामंडलेश्वर

जूना अखाड़ा में एक दलित संन्यासी का पट्टाभिषेक किया गया। मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक कर अखाड़ा के पंच परमेश्वर सहित अनेक महंतों ने उन्हें सिंहासन पर आसीन कराया।

By Ashish MishraEdited By: Published: Tue, 24 Apr 2018 01:10 PM (IST)Updated: Tue, 24 Apr 2018 01:10 PM (IST)
जूना अखाड़ा में दलित संन्यासी का पट्टाभिषेक, बनेंगे महामंडलेश्वर

इलाहाबाद (जेएनएन)। सामाजिक समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से सोमवार को यहां जूना अखाड़ा में एक दलित संन्यासी का पट्टाभिषेक किया गया। मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक कर अखाड़ा के पंच परमेश्वर सहित अनेक महंतों ने उन्हें सिंहासन पर आसीन कराया। फिर छत्र, चंवर, छाता, छड़ी व चौर प्रदान करधर्महित में काम करने का संकल्प दिलाया। मंगलवार को संगम पूजन कराकर इस संत को अखाड़े के काम में लगाया जाएगा। तीन माह तक गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, फिर कुंभ से पहले महामंडलेश्वर पद पर आसीन कर अखाड़ा में अंतरराष्ट्रीय स्तर का पद प्रदान किया जाएगा।

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मूलत: आजमगढ़ के बरौली निवासी कन्हैया कुमार कश्यप ज्योतिषी हैं। 2016 उज्जैन कुंभ में पंचानन गिरि से दीक्षा लेकर वह आजमगढ़ में लालगंज स्थित आश्रम में प्रवास करने लगे। सोमवार शाम यमुना बैंक रोड स्थित मौज गिरि मंदिर में उन्हें विधिवत संन्यास दिलाकर उनका पट्टाभिषेक किया गया। जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, अखाड़ा के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, जगद्गुरु पंचानन गिरि,

पुष्कर गिरि, नीलकंठ गिरि, प्रमेंद्र गिरि, हरिशंकर गिरि, स्वामी बृजभूषण दास ने चादर ओढ़ा कर उन्हें कन्हैया प्रभुनंद गिरि नाम दिया। महंत हरि गिरि का कहना है कि हमारे अखाड़ा में दलित, पिछड़ा, सिख व ब्राह्मण में कोई भेद नहीं है। हमने आदिशंकराचार्य व रामानंद के पदचिह्नों पर चलते हुए दलित व्यक्ति का पट्टाभिषेक किया है। 


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