विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 07, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, नाबालिग के अपराध की जानकारी मांगना निजता के अधिकार का हनन

By Umesh TiwariEdited By:
Published: Fri, 07 May 2021 06:00 AM (IST)Updated: Fri, 07 May 2021 07:48 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी पद पर नियुक्ति के समय अभ्यर्थी से नाबालिग ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नाबालिग के अपराध की जानकारी मांगना निजता अधिकार का हनन है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि नाबालिग के अपराध की जानकारी मांगना निजता अधिकार का हनन है

प्रयागराज, जेएनएन। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी पद पर नियुक्ति के समय अभ्यर्थी से नाबालिग रहते हुए अपराध के खुलासे की मांग उसे संविधान के अनुच्छेद-21 में मिले निजता व गरिमा के मूल अधिकार का उल्लंघन है। किसी भी नियोजक को नाबालिग के अपराध का खुलासा करने की मांग का अधिकार नहीं है।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि नाबालिग रहते हुए अपराध (जघन्य नहीं) में मिली सजा के आधार पर नियुक्ति से इनकार करने का भी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चयनित अभ्यर्थी नाबालिग रहने के दौरान हुए अपराध पर चुप रह सकता है और उसे इसकी जानकारी देने से इनकार करने का पूरा अधिकार है। ऐसा करना तथ्य छिपाना अथवा झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति अजय भनोट ने अनुज कुमार की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने फैसले में याची को पीएसी कांस्टेबल पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया है। साथ ही कमांडेंट 43 वीं बटालियन पीएसी एटा में नियुक्ति देने से इननकार करने के आदेश को मनमानापूर्ण करार देते हुए रद कर दिया है।

पूरे मामले के अनुसार याची 2018 पुलिस, पीएसी भर्ती में चयनित हुआ। एसपी एटा की रिपोर्ट पर नियुक्ति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि उसे नकल के अपराध में लोक अदालत से सजा मिली है। उसने जानकारी छिपाई है, इसे याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय बोर्ड से अपराध में मिली सजा को नियुक्ति से इनकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह सरकारी नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं मानी जाएगी।

अदालत ने कहा है कि नाबालिग और बालिग दोनों अनुच्छेद-14 के तहत अलग वर्ग हैं। बालिग के अपराध की जानकारी नियुक्ति के समय मांगी जा सकती है। छिपाने पर नियुक्ति से इनकार किया जा सकता है, लेकिन यह बात नाबालिग के अपराध पर लागू नहीं होगी। हां, 16 से 18 वर्ष के नाबालिग यदि हत्या, दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध के दोषी हों तो यह छूट उन्हेंं नहीं मिलेगी।