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    Allahabad High Court: जिलाधिकारी आदेश का करें पालन या फिर हाई कोर्ट में हो हाजिर

    By Ankur TripathiEdited By:
    Updated: Fri, 04 Mar 2022 09:51 PM (IST)

    हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी जौनपुर को 15 दिन में आदेश पालन का अंतिम अवसर दिया। कहा कि आदेश का पालन करें या चार अप्रैल को हाजिर हों। न्यायालय ने कहा कि जिलाधिकारी हाई कोर्ट की अपीलीय प्राधिकारी नहीं है। कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का उन्हें अधिकार नहीं है।

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    जौनपुर डीएम आदेश का पालन करें या हाजिर हों, सुनवाई चार अप्रैल को

    प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी जौनपुर मनीष कुमार वर्मा को 15 दिन में आदेश पालन का अंतिम अवसर दिया है। कहा कि आदेश का पालन करें या चार अप्रैल को हाजिर हों। न्यायालय ने कहा कि जिलाधिकारी हाई कोर्ट की अपीलीय प्राधिकारी नहीं है। कोर्ट के आदेश की व्याख्या करने का उन्हें अधिकार नहीं है। न ही वे अपने जवाबी हलफनामे के विपरीत स्टैंड ले सकते हैं। आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल नहीं की गई। आदेश अंतिम हो गया, जिसकी अवहेलना कोर्ट की अवमानना करना है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने चंद्रमणि की अवमानना याचिका पर दिया है।

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    याचिका पर अधिवक्ता आरएन यादव व अभिषेक कुमार यादव ने बहस की। कोर्ट ने कहा था कि सरकारी विभाग किसी से दैनिक या तय वेतन पर दशकों तक काम नहीं ले सकता। ऐसे कर्मी विनियमितीकरण के हकदार हैं। कोर्ट ने नियमित करने से इंकार के आदेश को रद करते हुए सेवा नियमित करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। उसका पालन नहीं करने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई है।

    याची जिला विकास कार्यालय जौनपुर में 1992 से इलेक्ट्रीशियन के रूप में कार्यरत है। नियमित वेतन भुगतान किया जा रहा है। सेवा के 29 साल बाद सेवा नियमित करने की मांग की, जो 22 मार्च 2018 को अस्वीकार कर दी गयी, जिसे चुनौती दी गई । इस पर कोर्ट ने याची को नियमित करने का आदेश दिया है। अब जिलाधिकारी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर कहा कि राम अंजोर कलेक्ट्रेट में कार्यरत था। उसे राजस्व विभाग के मजदूरी बजट से वेतन दिया जाता था।उसे नियमित कर लिया गया है। याची को विकास भवन के कंटिंजेंसी फंड से वेतन दिया जाता था। वह नियमित किये जाने का हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने कहा आदेश से पहले जवाबी हलफनामे में यह बात नहीं कही थी।