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    दादा कब्र में और दावा सनातनी हिंदू का, प्रयागराज में फिरोज गांधी की कब्र को लेकर घिरे राहुल गांधी

    By Ankur TripathiEdited By:
    Updated: Tue, 21 Dec 2021 11:10 AM (IST)

    राहुल गांधी के ट्वीट के बाद से राजनीतिक गलियारे में भूचाल आ गया है। राहुल अपने ही ट्वीट में ऐसा उलझे हैं कि वह जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। एमके शर्मा लिखते हैं राहुल गांधी को देश को बताना चाहिए कि ये कब से हिंदू हो गए।

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    राहुल गांधी के ट्वीट के बाद राजनीतिक गलियारे में आया हुआ है भूचाल

    प्रयागराज, जागरण संवाददाता। हिंदू मानते हैं कि हर व्यक्ति का डीएनए अलग और अनन्य होता है। हिंदुत्ववादी मानते हैं कि सब भारतीयों का डीएनए समान है।' अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद से राजनीतिक गलियारे में भूचाल आ गया है। राहुल अपने ही ट्वीट में ऐसा उलझे हैं कि वह जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। उन्हें घेरते हुए एमके शर्मा लिखते हैं राहुल गांधी को देश को बताना चाहिए कि ये कब से हिंदू हो गए। सवाल उठाया कि फिराेज खान के पोते कब से हिंदू संस्कृति रीति-रिवाज और हिंदुत्व पर उपदेश देने लगे।

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    इसके पूर्व गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल भाजपा के सवालों का जवाब देने के लिए कभी जनेऊधारी हिंदू बने तो कभी मानसरोवर यात्रा से शिवभक्त फिर राजस्थान मेंं विधानसभा चुनाव में खुद के हिंदू गोत्र का प्रमाण दे दिया था। गांधी-नेहरू परिवार के पुरोहित के जरिए राहुल ने अपना गाेत्र सार्वजनिक करवा दिया था। राहुल दत्तात्रेय कौल बाह्मण हैं। अब राहुल के ट्वीट पर देवराज गुप्ता लिखते हैं 'आपके दादा, श्री फिराज जहांगीर खान जी। शायद आप उनके बारे में जानते होंगे, उनका डीएनए किस हिंदू का था ताकि पता लगे कि आप वास्तव में हिंदू हैं। सिंपल व्याकरण है नहीं समझते। हिंदू नाउन है तो हिंदुत्व प्रोनाउन। हिंदू होते तो जानते।'

    दादा पारसी, फिर भी राहुल कौल ब्राह्मण

    राजस्थान चुनाव के दौरान गांधी-नेहरू परिवार के पुरोहित से जब ये पूछा गया था कि उनके दादा फिरोज गांधी तो पारसी थे, तो क्या दादा की जगह दादी इंदिरा गांधी का गोत्र हो सकता है। इस पर पुरोहित ने बताया कि पारसी समुदाय में पत्नी को हिंदू धर्म की तरह पति का गोत्र नहीं दिया जाता है। ऐसे में पीहर के गोत्र का इस्तेमाल हो सकता है। इसी वजह से इंदिरा गांधी ने भी पिता पंडित जवाहरलाल नेहरू का गोत्र कौल दत्तात्रेय ही रखा, लेकिन गांधी सरनेम और खानदान की सियासी हैसियत के चलते इस परिवार के सामने इससे पहले खुद का गोत्र बताने की राजनीतिक मजबूरी कभी नहीं आई थी।

    मम्फोर्डगंज में दफन हैं फिरोज

    आठ सितंबर 1960 को हार्टअटैक के कारण 48 साल की उम्र में फिराेज गांधी का निधन हो गया था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी फिरोज जहांगीर गांधी पारसी परिवार से ताल्लुक रखते थे। तत्कालीन सांसद फिरोज गांधी के निधन के बाद इलाहाबाद के मम्फोर्डगंज मोहल्ले स्थित पारसी समुदाय के कब्रिस्तान में दफन किया गया था। 1980 में मेनका गांधी और उसके बाद सोनिया गांधी यहां आई थीं। उसके बाद परिवार का कोई सदस्य इस कब्रिस्तान में नहीं आया। इस कब्रिस्तान की देखभाल एक चौकीदार करता है। कब्रिस्तान में कुआं और एक मकान के अलावा चौकीदार के रहने के लिए दो कमरे भी बने हुए हैं। देखभाल के अभाव में फिरोज गांधी सहित उनके पूर्वजों की कब्र जर्जर हो चुकी हैं।