अमरदीप भट्ट, प्रयागराज। शैक्षणिक कार्यों के अतिरिक्त समाज सेवा में यथाशक्ति योगदान देकर 150 साल की स्वर्णिम यात्रा कर चुके कायस्थ पाठशाला ने संगमनगरी से समूचे भारत को अनूठा संदेश दिया है। जौनपुर के मुंशी काली प्रसाद कुलभाष्कर ने यहीं बहादुरगंज में 1872 में सात विद्यार्थियों के साथ कायस्थ पाठशाला की नींव डाली थी।

शिक्षा के प्रति समर्पण बना मिसाल, दान दाताओं दिल खोलकर समर्पित की संपत्ति

शिक्षा के प्रति उनके समर्पण की भावना को इसी बात से समझा जा सकता है कि उन्होंने अपने वसीयतनामे में अपनी सभी कोठियों, जमीन जायदाद के अलावा दैनिक उपयोग की समस्त वस्तुओं को कायस्थ पाठशाला के नाम लिख दिया था। वर्तमान में कायस्थ पाठशाला का फैलाव देश के कई अन्य जिलों तक हो चुका है।

दरअसल कायस्थ पाठशाला एशिया महाद्वीप की एक विशालतम शैक्षणिक संस्था बन चुकी है। यह अब शिक्षा के वटवृक्ष की तरह सभी के सामने है। सीएमपी स्नातकोत्तर कालेज (संघटक इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय), केपी बीएड कालेज (संघटक इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय), कुलभाष्कर आश्रम कृषि परास्नातक महाविद्यालय (संबद्ध डा. राजेंद्र सिंह ''रज्जू भइया' विश्वविद्यालय), केपी इंटरमीडिएट कालेज, केपी गल्र्स इंटर कालेज, कुलभाष्कर आश्रम कृषि महाविद्यालय, केपी कान्वेंट स्कूल, केपी नर्सरी स्कूल, केपी बीटीसी ट्रेनिंग कालेज, केपी यूनिवर्सिटी कालेज एवं छात्रावास, मेजर रंजीत सिंह स्पोट्स कालेज, केपी कम्युनिटी सेंटर समेत कई शिक्षण और सामुदायिक संस्थाएं संचालित हैं।

चौधरी महादेव प्रसाद ने दान की थी अरबों की संपत्ति

कायस्थ पाठशाला के दानदाताओं की सूची तो काफी लंबी है, लेकिन चौधरी बाबू महादेव प्रसाद के दान काे जानना यहां सभी के लिए आवश्यक है। केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष चौ. जीतेंद्र नाथ सिंह बताते हैं कि चौधरी महादेव प्रसाद ने अपनी एक संतान के होते हुए कायस्थ पाठशाला के लिए अरबों रुपये की चल-अचल संपत्ति सोसायटी में दान कर दी थी। 1914 में उन्होंने अपनी वसीयत की थी तथा अपने ही नाम से यानी चौधरी बाबू महादेव प्रसाद ट्रस्ट बनाया। इसका मुतवल्ली अध्यक्ष उन्होंने कायस्थ पाठशाला को ही बनाया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना भी चौ. बाबू महादेव प्रसाद के अतुलनीय योगदान से हुई।

इन विभूतियों का रहा जुड़ाव

कायस्थ पाठशाला की अलग-अलग संस्थाओं से छात्र रूप में पूर्व राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा, राज्य सभा सदस्य जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, महर्षि महेश याेगी, गणेश शंकर विद्यार्थी जुड़े रहे। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, प्रसिद्ध उर्दू शायर प्रो. रघुपति सहाय ''''फिराक गोरखपुरी '''', पं. बालकृष्ण भट्ट और डा. हरिवंश राय बच्चन आदि इससे जुड़े रहे।

15 हजार छात्र केवल सीएमपी में

कायस्थ पाठशाला प्रबंधन के अनुसार करीब 25 हजार छात्र छात्राएं वर्तमान में इसकी शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें केवल सीएमपी स्नातकोत्तर कालेज में ही छात्र संख्या करीब 15000 है।

इनसे सुशोभित हो चुका है अध्यक्ष पद

मेजर डीआर रंजीत सिंह, मुंशी हरनंदन प्रसाद, न्यायमूर्ति कमलाकांत वर्मा, मुंशी अंबिका प्रसाद, डा. नारायण प्रसाद अस्थाना, डा. प्यारेलाल श्रीवास्तव, चौ. शिवनाथ सिंह, पूर्व गृहमंत्री एवं शिक्षामंत्री चौ. नौनिहाल सिंह, चौ. अमरनाथ सिंह, डा. केपी श्रीवास्तव, टीपी सिंह और चौ. राघवेंद्र सिंह।

सभी को शिक्षा प्रमुख उद्देश्य

कायस्थ पाठशाला की शुरुआत 1872 में मुंशी काली प्रसाद ने बहादुरगंज में इसलिये शुरू की थी क्योंकि तब भारत अंग्रेजों की गुलामी में था। अंग्रेज नहीं चाहते थे कि भारतीयों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। यही बात मुंशी काली प्रसाद के दिल में बैठ गई और उन्होंने स्वयं कायस्थ पाठशाला की नींव डाल दी। अब उनका लगाया पौधा वटवृक्ष बन चुका है। हमारी कोशिश है कि इस वटवृक्ष की छांव में सभी को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिले।

चौ. जीतेंद्रनाथ सिंह, अध्यक्ष कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट

Edited By: Ankur Tripathi

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