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अलीगढ़ फर्जी बैनामा केस: मौत के 11 साल बाद कागजों में जिंदा हुआ 'टीका', मोबाइल नंबर और OTP से खुली साजिश की परतें

By Karan ChaudharyEdited By: Abhishek Saxena
Published: Tue, 13 Oct 2026 07:44 AM (GMT+05:30)

अलीगढ़ में 2014 में मृत व्यक्ति टीकम सिंह को कागजों में जीवित दिखाकर 580 वर्गमीटर बेशकीमती जमीन का फर्जी बैनामा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।।

सांकेतिक तस्वीर।।

HighLights

  1. मृत टीकम सिंह की जमीन का फर्जी बैनामा।

  2. प्रधान पति धर्मेंद्र चौहान मुकदमे में शामिल।

  3. ओटीपी और कॉल डिटेल से खुला राज।

करन चौधरी, हरदुआगंज (अलीगढ़)। जमीन की कीमत बढ़े तो उसे कब्जाने के लिए किस हद तक साजिश रची जा सकती है, हरदुआगंज के साधुआश्रम चौराहे के पास स्थित बेशकीमती भूखंड का मामला इसकी बानगी है। जिस टीकम सिंह उर्फ टीका की मृत्यु वर्ष 2014 में हो चुकी थी, उसे कागजों में जीवित दर्शाकर चार सितंबर 2025 को उसकी 580 वर्गमीटर जमीन का बैनामा करा दिया गया।

जमीन पर निर्माण शुरू हुआ तो ग्रामीणों को शक हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा। इसमें अब उखलाना गांव की प्रधान के पति धर्मेंद्र चौहान की भूमिका सामने आई है। पुलिस ने उनका नाम मुकदमे में शामिल कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, बैनामे के पंजीकरण में दर्ज मोबाइल नंबर, ओटीपी और बैनामे वाले दिन हुई बातचीत की पड़ताल से मामले की अहम कड़ियां सामने आई हैं।

580 वर्गमीटर बेशकीमती जमीन का मृतक के नाम से कराया गया था फर्जी बैनामा

तहसील कोल की ग्राम पंचायत उखलाना के मजरा सफेदपुरा निवासी टीकम सिंह उर्फ टीका कई साल पहले अतरौली में बस गए थे। वर्ष 2014 में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके नाम रामघाट रोड से सटी गाटा संख्या 1490क में 580 वर्गमीटर जमीन भूलेख में दर्ज है। कई वर्षों से खाली पड़े इस भूखंड पर कब्जे की साजिश का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, चार सितंबर 2025 को टीका को जीवित दर्शाकर उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति से जमीन का बैनामा अतरौली क्षेत्र के चाउपुर हौज निवासी सचिन गौड़ के नाम करा दिया गया। इसके बाद जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन के वास्तविक मालिक टीका की मृत्यु वर्ष 2014 में ही हो चुकी थी, तो उनके नाम से बैनामा कैसे हो गया?


जेसीबी चालक के मोबाइल नंबर से जुड़ी कड़ियों के आधार पर पुलिस ने की कार्रवाई

अलीगढ़ के आईटीआई रोड निवासी रंजन राना ने एसएसपी से शिकायत की। बताया कि मृतक को जीवित दर्शाकर जमीन का बैनामा कराया गया है। इसके आधार पर 25 अगस्त 2026 को सचिन गौड़, टीका बनकर बैनामा कराने वाले अज्ञात व्यक्ति और गवाहों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की जांच साधुआश्रम चौकी प्रभारी रोहित दांगी को सौंपी गई। जांच के दौरान उखलाना गांव की प्रधान ललितेश चौहान के पति धर्मेंद्र चौहान की भूमिका सामने आई। धर्मेंद्र चौहान साधू-आश्रम कासिमपुर रोड पर भट्टा संचालित करते हैं।

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पुलिस ने किया ये दावा

पुलिस का दावा है कि जमीन कब्जाने के लिए रची गई साजिश में उनकी अहम भूमिका थी। इसके बाद उनका नाम भी मुकदमे में शामिल कर लिया गया। अब पुलिस फर्जी बैनामे के पीछे शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इस संबंध में प्रधान के पति आरोपित धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि कुछ विरोधी लोगों ने मेरे खिलाफ साजिश रची है। इसमें उनका कोई लेना देना नहीं है।

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फर्जी बैनामे की टाइमलाइन

  • 2014: टीकम सिंह उर्फ टीका की मृत्यु हुई।
  • चार सितंबर 2025: टीका को जीवित दर्शाकर जमीन का बैनामा सचिन गौड़ के नाम कराया गया।
  • 25 अगस्त 2026: एसएसपी से शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ।
  • जांच : जेसीबी चालक के मोबाइल नंबर और ओटीपी के आधार पर धर्मेंद्र चौहान की भूमिका सामने आई।
  • वर्तमान स्थिति: धर्मेंद्र का नाम मुकदमे में शामिल, अन्य आरोपितों की तलाश जारी।

जांच के अहम पहलू

  1. फर्जी बैनामा कराने वाला अज्ञात व्यक्ति: मृतक टीका की जगह बैनामा कराने वाले व्यक्ति की पहचान कर पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
  2. ओटीपी साझा करने की कड़ी: जेसीबी चालक सत्यपाल ने पूछताछ में धर्मेंद्र चौहान के कहने पर ओटीपी देने की बात कही है।
  3. धर्मेंद्र-सचिन के बीच बातचीत: पुलिस के मुताबिक, बैनामे वाले दिन दोनों के बीच लगातार बातचीत हुई थी। इसकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
  4. गवाहों की भूमिका: फर्जी बैनामे में शामिल गवाहों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है

ओटीपी और कॉल डिटेल से खुलीं साजिश की कड़ियां

सीओ अतरौली अनिवेश कुमार ने बताया कि फर्जी बैनामे के मामले में आरोपितों की तलाश की जा रही है। तहसील में बैनामे के पंजीकरण के दौरान दर्ज मोबाइल नंबर की जांच की गई तो वह धर्मेंद्र चौहान के भट्टे पर जेसीबी चलाने वाले सत्यपाल निवासी मैंमड़ी, थाना गोधा का निकला। पूछताछ में सत्यपाल ने बताया कि धर्मेंद्र चौहान के कहने पर उसने अपने मोबाइल पर आई ओटीपी दी थी।

बैनामे वाले दिन धर्मेंद्र चौहान और सचिन गौड़ के बीच लगातार बातचीत भी हुई थी। साक्ष्यों के आधार पर धर्मेंद्र चौहान का नाम मुकदमे में शामिल किया गया है। पुलिस अब फर्जी टीका बनकर बैनामा कराने वाले व्यक्ति और गवाहों की तलाश कर रही है।