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    मिलावटी शराब से कम जहरीला नहीं होता है डिटर्जेंट व कास्टिक सोड़ा से तैयार दूध Aligarh News

    By Sandeep Kumar SaxenaEdited By:
    Updated: Fri, 04 Jun 2021 07:11 AM (IST)

    जिले में जहरीली शराब का कहर देख ही रहे हैैं। दूध से भी सावधान रहिए। मिलावटी दूध की बिक्री बड़े स्तर पर हो रही है। रिफाइंड यूरिया डिटर्जेंट पाउडर व कास्टिक सोडा मिलाकर भी दूध बनाया जा रहा है जो मिलावटी शराब से कम खतरनाक नहीं है।

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    जिले में जहरीली शराब का कहर देख ही रहे हैैं।

    अलीगढ़, सुरजीत पुंढीर। जिले में जहरीली शराब का कहर देख ही रहे हैैं। दूध से भी सावधान रहिए। मिलावटी दूध की बिक्री बड़े स्तर पर हो रही है।  रिफाइंड, यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर व कास्टिक सोडा मिलाकर भी दूध बनाया जा रहा है, जो मिलावटी शराब से कम खतरनाक नहीं है। इसके लिए टप्पल व अकराबाद क्षेत्र सबसे अधिक बदनाम हैैं। सरकारी आंकड़े देखें तो पिछले तीन साल में 50 फीसद से ज्यादा दूध के नमूने फेल हुए हैैं। साफ है कि जिले में आधे से ज्यादा लोग मिलावटी दूध पी रहे हैं। दुधारू पशु की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। 2012 की पशु गणना के मुकाबले 2018 की गणना में भैैंस की संख्या में 80 हजार की कमी हुई। जिले की आबादी निरंतर बढ़ रही है। दूध की मांग भी बढ़ी है, जिसकी पूर्ति मिलावटी दूध से की जा रही है। 

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    ऐसे तैयार होता है मिलावटी दूध

    मिलावटी दूध में लागत से दोगुनी कमाई होती है। अफसरों के अनुसार एक लीटर दूध में पहले आधा किलो सोडा व इतना ही डिटर्जेंट पाउडर मिलाकर बड़े बर्तन में डाला जाता है। कुछ देर बाद एक एक लीटर रिफाइंड मिला दिया जाता है। लगभग आधे घंटे बाद इसमें 10 लीटर पानी मिला देते हैैं। इसमें यूरिया खाद, गीला ग्लूकोस या फिर पनीर का गंदा पानी भी मिलाया जाता है। इस तरह करीब 14 लीटर दूध तैयार किया जाता है। इस पर करीब 300 रुपये का खर्च आता है। बाजार में 50 से 55 रुपये लीटर दूध बिक रहा है। 

    मिलावटी दूध के नुकसान

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मिलावटी दूध पीने से कैंसर, दमा, लकवा, हार्टअटैक, एनीमिया जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं। कई बार केमिकलों की मात्रा अधिक होने पर दूध पीते ही लोगों की जान भी चली जाती है।

    तीन साल में जांच की स्थिति

    वित्त वर्ष,सैैंपल,फेल

    2018-19,55,35

    2019-20,210,68

    2020-21,120,59

     इस तरह कम हो रही है पशुओं की संख्या

    पशुओं की प्रजाति, 2012, 2018

    कुल गोवंशीय, 202870, 311298

    गोवंशीय देशी, 135951, 153343

    गोवंशीय विदेशी, 66919, 157955

    दूध दे रहीं गायें, 75513, 122588

    गर्भाधान योग्य गायेंं,103850,162609

    महिषवंशीय,1130409, 942498

    गर्भाधान योग्य महिषवंशीय, 530122, 456859

    कुल गोवंशीय व महिषवंशीय, 1333279, 1253796

    कुल भेड़, 10463, 9974

    कुल बकरी, 173119, 136605

    ऐसे करें मिलावटी दूध की पहचान

    - थोड़ा सा कच्चा दूध मुंह में रखकर देखें। कड़वाहट लगे तो समझ जाएं कि मिलावटी है।

    - दूध को शीशी में भरकर हिलाएं। बहुत ज्यादा झाग बन रहे हैैं तो समझ लें कि कोई केमिकल मिलाया गया है।

    - दूध को चिकनी सतह पर बहाएं।  दूध झाग छोड़ रहा हो तो समझ लिया जाए कि मिलावटी है।

    -दूध में हल्दी डालें। रंग लाल हो रहा है तो समझ जाएं कि मिलावट हुई है।

     यह है सजा का प्रावधान

    - दूध में कोई जानलेवा पदार्थ मिला है तो आजीवन कारावास तक की सजा का प्रविधान है।

    - हानिकारक पदार्थ न होने पर भी मिलावट में पांच लाख रुपये तक का अधिकतम जुर्माना लग सकता है।

    -कोई भी व्यक्ति इसकी शिकायत कलक्ट्रेट स्थित एफएसडीए कार्यालय में कर सकता है।

     2012 व 2018 में पशुगणना हुई थी। इसमें सामने आया था कि महषिवंशीय पशुओं की संख्या में कमी आई है। गोवंश में वृद्धि हुई है। जिले में पशुपालन से आय बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।

    डा. सत्यवीर सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी

     मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य व औषधि सुरक्षा प्रशासन गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जांच में जो नमूने फेल मिलते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

    सर्वेश मिश्रा, अभिहित अधिकारी

    मिलावटी दूध भी एक तरह का जहर है। यह लोगों की किडनी व गुर्दों पर असर डालता है। इससे कैंसर, लकवा समेत अन्य बीमारियां हो सकती हैैं।

    डा. एसके सिंह, वरिष्ठ फिजीशियन