Cybercrime : आप सोशल मीडिया पर हैं तो सतर्क रहें, एक क्लिक पर आपका सबकुछ लुट सकता है
Cybercrime सोशल प्लेटफार्म अब विश्वसनीय नहीं रहा। अगर आप जरा चूके तो बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। सोशल प्लेटफार्म पर साइब्रर अपराधियों ने अपने जाल बिछा रखे हैं। ऐसे में यूजर्स को चाहिए कि सावधानी से इनका प्रयोग करें।

अलीगढ़, जेएनएन । अगर आप WhatsApp, Twitter, Facebook, Instagram और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप खतरे में हैं। इन दिनों साइबर क्राइम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग समझते हैं कि सोशल मीडिया (Social Media) दोस्तों, परिवार और वर्कर्स के साथ कम्यूनिकेट करने के सबसे लोकप्रिय और मनोरंजन साधनों में से एक है, लेकिन आजकल इन प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा फ्रॉड (Online Fraud) और धोखाधड़ी होती है।
Social Media पर आमतौर पर एक मैसेज रिसीव होता है जो कुछ गिफ्ट या बेनेफिट का वादा करता है और उन्हें वहां कुछ लिंक पर क्लिक करने के लिए इनवाइट करता है। जो इनके बहकावे में आ गया वह ठगी का शिकार हो जाता है। इसलिए सोशल प्लेटफार्म पर सतर्क रहने की जरूरत है।
बिना सोचे समझे किसी लिंक पर क्लिक न करें
यूजर्स को लिंक्स पर क्लिक करके ही इन बेनिफिट्स का फायदा उठाने का एकमात्र तरीका बताया जाता है। हालांकि, जैसे ही यूजर लिंक पर क्लिक करता है, कुछ ऐप या मेलवेयर यूजर के फोन या कंप्यूटर पर अपने आप डाउनलोड हो जाएंगे। ये यूजर्स की जासूसी करने और घोटालेबाजों को जानकारी भेजने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं इससे यूजर्स की सभी एक्टिविटी पर आसानी से नजर रखी जा सकती है और यूजर्स की जानकारी के बिना सूचना भेजी जाती है।
इन तरीकों से फंसाते हैं जाल में
साइबर ठगों की नजर मंत्रियों, विधायकों, अफसरों, व्यवसायियों व नामचीन हस्तियों के फेसबुक एकाउंट पर रहती है। उनके अकाउंट का ठीक से अध्ययन करने के बाद ठग संबंधित व्यक्ति के मित्रों की सूची में शामिल लोगों को मैसेज भेजकर तबीयत खराब होने, अस्पताल में भर्ती होने और अति आवश्यक कार्य में व्यस्तता समेत तमाम विषम परिस्थितियों का हवाला देते हुए तात्कालिक रूप से रुपयों की मांग करता है। शाम तक या कल सुबह तक रुपये वापस करने का भरोसा भी देता है। इसी बहाने अगर कोई झांसे में आ गया तो उससे रुपये ठगकर अपराधी संबंधित फर्जी आइडी को क्लोज कर देता है।
hackers रहते हैं सक्रिय
यूजर्स को कुछ फॉर्म भरने के लिए कहा जाता है और इसके लिए यूजर्स को अलग-अलग यूजरनेम और यहां तक कि पासवर्ड प्रदान करने की जरूरत होती है। ये फॉर्म नकली होते हैं और ये आमतौर पर फर्जी वेबसाइट्स पर पाए जाते हैं जिन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे एक ऑफिशियल बैंक या दूसरे इंस्टीट्यूशन के समान दिखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल हैकर्स द्वारा रची गई इन साजिशों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को ठगा जाता है। ऐसे धोखेबाजों के झांसे में न आने के लिए यूजर्स को कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
केस-1
गूलर रोड निवासी पूनम से शातिर ने 25 मार्च को क्रेडिट कार्ड अधिकारी बनकर 94 हजार 940 रुपये की ठगी की थी। इसमें साइबर सेल ने पेमेंट गेटवे संपर्क करके राशि को रुकवाया और पूरी राशि वापस कराई।
केस-2
भुजपुरा निवासी चंद्रवीर सिंह के साथ शातिर ने 20 जनवरी को परिचित बनकर फोन किया और खाते से 98 हजार रुपये पार कर दिए। इसमें भी साइबर सेल ने पूरी राशि वापस कराई।
केस-3
31 दिसंबर 2021 को धौर्रा गली नंबर चार निवासी सेवानिवृत्त प्रोफेसर खामिद आजम से शातिर ने पैन कार्ड अपडेट कराने के नाम पर 4.24 लाख ठग लिए। इसमें साइबर थाना की टीम ने चार लाख रुपये वापस कराए हैं।
ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचें
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब भी किसी फेसबुक आइडी से मदद के नाम पर रुपये मांगे जाएं तो पहले उस व्यक्ति के मोबाइल या किसी संपर्क नंबर पर उससे कॉल कर लें। हकीकत का पता चल जाएगा। इतना ही नहीं, कुछ उपाय अपनाकर आप आपके फेसबुक आइडी को सुरक्षित भी बना सकते हैं। क्लोन आइडी साइबर अपराधी तब ही नहीं बना पाएगा, जब आपके आइडी की प्राइवेसी सेटिंग मजबूत न हो। अपना आइडी ओनली मी या ओनली फ्रेंड में रखेंगे तो साइबर अपराधी आपकी आइडी में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
- जब भी कोई बड़ा फायदा देने का वादा करे और पैसे मांगे तो उसे समझ लेना की वो कोई स्कैम का हिस्सा है जो आपको ठग सकता है। अगर ऐसा आपके साथ होता है तो समझ जाइयेे कि कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है और जो लोग इसका वादा करते हैं, वे आपसे ठगी का प्रयास कर रहे हैं।
- जब भी कोई आपसे यूजरनेम और पासवर्ड या दूसरी पर्सनल जानकारी मांगे तो समझ जाइये कि आपके साथ धोखा होने वाला है। एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी बैंक या अन्य वैध व्यवसाय आपसे ये सीक्रेट विवरण नहीं मांगेगा।
- बैंकिंग डिटेल्स जो कभी भी किसी के साथ शेयर नहीं किए जाते हैं उनमें क्रेडिट और डेबिट कार्ड नंबर, CVV, PIN, इंटरनेट बैंकिंग यूजर ID, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड शामिल हैं।
- कभी भी कोई OTP (वन टाइम पासवर्ड) शेयर न करें जो आपको प्राप्त हुआ हो। यह धोखेबाजों द्वारा आपके बैंक अकाउंट, या आपके पास मौजूद अन्य दूसरे पर्सनल अकाउंट तक पहुंचने का प्रयास हो सकता है। इनमें आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) से लेकर ई-कॉमर्स वेबसाइट तक कुछ भी शामिल हो सकता है।
- फेसबुक पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें।
- किसी अन्य मोबाइल या डेस्कटाप पर अपनी गोपनीय आइडी खोलने से बचें।
- अज्ञात क्यूआर कोड स्कैन करने से बचें।
- किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक को क्लिक न करें।
- वो फोन काल, जिसमें आपकी बैंक संबंधी जानकारी मांगी जा रहा हो, उसने जानकारी साझा न करें।
- कभी भी बैंक संबंधी जानकारी फोन पर शेयर न करें।
- किसी इनामी योजना के फोन काल पर कोई जानकारी साझा न करें।
- किसी प्रकार का एप जैसे एनीडेस्क, टीववीवर आदि मोबाइल में इंस्टाल न करें।
इनका कहना है
आनलाइन ट्रांजेक्शन करते वक्त पूरी तरह से सावधान रहें। किसी के बहकावें में न आए। अपनी व्यक्तिगत या जानकारी किसी से साझा न करें। अनाधिकृत लिंक पर क्लिक न करें। न ही किसी लालच या डर में आएं। कोई भी ठगी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें।
मनीष कुमार शांडिल्य, एएसपी व सीओ, साइबर सेल
साइबर अपराध को लेकर गंभीर है। अपराधियों पर कार्रवाई करने के साथ लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। कई मामलों में पीड़ितों के रुपये वापस भी कराए हैं।
- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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