'अंतरिक्ष में डर लगा तो हनुमान चालीसा ने दी ताकत' शुभांशु शुक्ला बोले- स्पेस ट्रैवल इंडिया के लिए बन जाएगा फुलटाइम प्रोफेशन
भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा के लिए उन्हें राकेश शर्मा ने प्रेरित किया। स्पेस सूट में समय बिताना कठिन रहा, क्योंकि वहां न हवा थी, न पानी और न ग्रेविटी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं बल्कि डर पर विजय पाना है और उन्हें हनुमान चालीसा से शक्ति मिली। यह बयान उन्होंने रविवार रात ताला नगरी स्थित संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के वार्षिकोत्सव में दिया।

जागरण संवाददाता, अलीगढ़। भारतीय अंतरिक्ष यात्री एवं वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का कहना है कि अंतरिक्ष पर जाने के लिए उन्हें राकेश शर्मा ने प्रेरित किया। स्पेस सूट में समय बिताना वाकई बहुत कष्टकारी रहा, क्योंकि वहां न हवा है न पानी है न ग्रेविटी थी। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि डर पर विजय होती है। मुझे हनुमान चालीसा से बहुत ताकत मिली। वह रविवार की रात यहां ताला नगरी स्थित संत फिदेलिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव में शामिल हुए।
शुभांशु ने संवाद सत्र में छात्र-छात्राओं को प्रेरणा, जिज्ञासा और साहस की एक नई दिशा दी। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरने से लेकर वहां पहुंचने पर डर से बचने और खुद को मजबूत रखने के लिए मैं हनुमान चालीसा पढ़ता था। जैसे ही उन्हें यह बात कही पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
बॉडी मूव करने में भी रखना होता है ध्यान
भारत ऊपर से कैसा दिखता है, इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ बता नहीं सकता… मैं दिखा सकता हूं। और मैं पूरे विश्वास से कहता हूं कि पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का वाक्य सारे जहां से अच्छा, आज भी उतना ही सच है। आपके ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं का ओरिएंटेशन नहीं है। खुद की बाडी को मूव करने में भी आपको ध्यान रखना पड़ता है।
हम इसे बार-बार करते रहेंगे और अंतरिक्ष यात्रा हमारे देश में एक पूर्णकालिक पेशा बन जाएगा। शुभांशु ने अंतरिक्ष अभियान शुरू होने से लेकर अंतरराष्ट्रीय अंतरक्षिक केंद्र में बिताए क्षणों को वीडियो के माध्यम से साझा किया। कई ऐसे वीडियोे दिखाएं, जिसमें वह शून्य ग्रेविटी में मस्ती करते हुए दिखे। बोले, तो डर लगा, मगर बाद में आने का मन नहीं था।

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