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एएमयू छात्र राजनीति का स्वर्णिम इतिहास: कैंपस से निकले राष्ट्रपति, मंत्री और दिग्गज नेता

Published: Sat, 10 Oct 2026 01:54 PM (GMT+05:30)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति ने देश को कई बड़े नेता दिए हैं, जिनमें मंत्री, मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति तक ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

फाइल फोटो।

HighLights

  1. AMU छात्र राजनीति ने देश को दिए बड़े नेता।

  2. मंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति तक बने पूर्व छात्र।

  3. आठ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की बहाली।

संतोष शर्मा, अलीगढ़। मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्रसंघ चुनाव केवल पद हासिल करने की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि देश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने का मंच भी रहा है। यहां छात्र राजनीति से निकले कई चेहरे विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री बने तो कुछ ने मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक का सफर तय किया।

आरिफ मोहम्मद खान, आजम खान और एमएए फातिमी जैसे नेताओं की राजनीतिक यात्रा इसका उदाहरण है। अब करीब आठ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की बहाली का रास्ता खुलने के साथ एक बार फिर कैंपस की राजनीति और उससे निकलने वाले नेतृत्व को लेकर छात्र सक्रिय हो गए हैं। शेरवानी सिलवानी भी शुरू कर दी हैं।

एएमयू की छात्र राजनीति ने देश को दिए कई बड़े नेता

एएमयू में 1920-21 में हुए पहले छात्रसंघ चुनाव में केएम खुदा बख्श अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद कई छात्रसंघ पदाधिकारी राष्ट्रीय और प्रादेशिक राजनीति में सक्रिय हुए। 1972-73 में अध्यक्ष चुने गए आरिफ मोहम्मद खान ने 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर बुलंदशहर की स्याना सीट से विधानसभा चुनाव जीता। बाद में कांग्रेस में शामिल होकर 1980 में सांसद बने और इंदिरा गांधी तथा राजीव गांधी की सरकारों में मंत्री रहे। इसके बाद वह जनता दल में गए और वीपी सिंह सरकार में भी मंत्री पद संभाला।

पूर्व छात्रसंघ सचिव एमएए फातिमी भी दरभंगा से सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे। 1977-78 में अध्यक्ष रहे जावेद हबीब पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विशेष दूत रहे और राज्यसभा सदस्य भी बने। 1987 में अध्यक्ष चुने गए सरवर हुसैन भी बुलंदशहर से सांसद बने।

आजम खान से नफीस अहमद तक

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान एएमयू छात्रसंघ के सचिव रहे हैं। छात्र राजनीति के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई और मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव की सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2006-07 में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए छात्र राजनीति से

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री तक

एएमयू से शिक्षा हासिल करने वाले डॉक्टर जाकिर हुसैन विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। वह देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी एएमयू में शिक्षा प्राप्त की और पांच वर्ष तक कुलपति रहे। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर भी एएमयू के छात्र रहे। असम की पूर्व मुख्यमंत्री अनवरा तैमूर ने विश्वविद्यालय के वीमेंस कॉलेज में पढ़ाई की थी।

छात्र राजनीति को जरूरी मानते हैं पूर्व पदाधिकारी

धरने में शामिल हुए छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी के अनुसार, छात्र राजनीति से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के साथ राष्ट्रीय मुद्दों को समझने का अवसर मिलता है। उन्हें चुनाव से वंचित नहीं रखा जा सकता। एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सलमान इम्तियाज के अनुसार, सर सैयद अहमद खान ने सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर चर्चा के उद्देश्य से वाद-विवाद की परंपरा को बढ़ावा दिया था, जो आगे चलकर यूनियन हॉल से जुड़ी। विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की खासियत यह भी रही है कि चुनाव में राजनीतिक दलों का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।

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एएमयू छात्रसंघ के इतिहास में विदेशी छात्र नेता की भी रही भूमिका

छात्रसंघ का इतिहास केवल भारतीय राजनीति को नेतृत्व देने तक सीमित नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के अमीन ए. बुलबुलिया का नाम भी छात्रसंघ के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार के अनुसार बुलबुलिया छात्रसंघ के पहले विदेशी छात्र नेता थे। वर्ष 1953-54 के छात्रसंघ चुनाव में उन्होंने भाग लिया था। छात्रसंघ के संविधान का प्रारूप तैयार करने में भी उनकी भूमिका रही।

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