अलीगढ़, जेएनएन ।  भाजपा के प्रदेश सह संगठन मंत्री भवानी सिंह का असमय जाना हर किसी को अखर रहा है। अपने जीवन काल में सैकड़ों कार्यकर्ता भवानी सिंह ने खड़े किए होंगे। सांसद, विधायक बनाया। मंत्री बनवाया, मगर अंहकार और अभिमान उन्हें छू तक नहीं सका। सहज और सरल व्यक्तित्व से वह लोगों के दिलों में जगह बनाए रखे। उनकी कार्यशैली ने पश्चिम यूपी में एक भाजपा को नई संजीवनी मिली। अलीगढ़ में जहां एक सीट भी भाजपा के पास नहीं थी, उनके कार्यकाल में सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा हो गया। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब किसी दल ने जिले की सभी सीटों पर जीत दर्ज की।

संघ से की थी शुरुआत

भवानी सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपनी शुरुआत की। बालकाल्य से स्वयंसेवक थे। संघ स्थान पर प्रार्थना, खेलकूद, बौद्धिक आदि से वो निखरते चले गए। विभाग प्रचारक से आगे बढ़े तो भाजपा से नई पारी की शुरुआत की। आरएसएस ने उन्हें भाजपा में भेज दिया। लंबे समय तक वह ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रुप में रहे। आगरा केंद्र होने के चलते अलीगढ़ से खासा लगाव रहा। हालांकि, वाराणसी जाने के बाद भी उनका ब्रज क्षेत्र से लगाव कम नहीं हुआ। अलीगढ़ प्रवास पर उनका सदैव आना होता था। 2017 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव था। भाजपा अपनी जमीन तलाश रही थी। भवानी सिंह के नेतृत्व में पश्चिमी यूपी में उन्हें पार्टी को नई चेतना की जिम्मेदारी दी गई। अलीगढ़ के संगठन को उन्होंने मजबूत किया। लगातार बैठक, संपर्क, संवाद से उन्होंने भाजपा को नई चेतना दी। पीएम नरेंद्र मोदी की विशाल रैली कराई। इसका जादू चला। भाजपा सात सीटों पर काबिज हो गई। पहली बार ऐसा था कि जब भाजपा ने सातों विधानभा क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी। हर तरफ भगवा था, हर तरफ कमल का फूल था। कार्यकर्ताओं में जबदस्त उत्साह और उमंग था। यह कुशल शिल्पी भवानी सिंह के नेतृत्व का असर था। वह बातों-बातों में कार्यकर्ताओं को आकर्षित कर लिया करते थे।

कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पित रहते थे

आरएसएस के प्रचारक रहे भूपेंद्र शर्मा बताते हैं कि कार्यकर्ताओं के प्रति वह सदैव समर्पित रहते थे। उनकी कुशलता पूछना, उन्हें आगे बढ़ाना आदि कार्य किया करते थे, जिससे संगठन लगातार मजबूत होता चला जा रहा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भवानी सिंह की अहम भूमिका रही। अलीगढ़ में टिकट को लेकर खूब गुटबाजी रही। इसका फायदा विपक्षी उठाना चाहते थे, मगर भवानी सिंह ने पूरे संगठन को जोड़कर रखा। कार्यकर्ताओं से कहा कि हमें राष्ट्र को देखना है। यदि एक-एक कड़ी कमजोर होगी तो देश कमजोर होगा। इसलिए हमें हरहाल में अलीगढ़ की सीट जीतना होगा। इसका परिणाम रहा कि सांसद सतीश कुमार गौतम दोबारा विजयी हुए। जिला महामंत्री शिव नारायन शर्मा कहते हैं कि कार्यकर्ताओं के अंर्तमन को जान लिया करते थे। फिर चाहे कोई कितनी बुराई करे मगर वो कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने में पूरी मदद करते थे। उन्हें पता रहता था कि कौन कार्यकर्ता आगे बढ सकता है और काम कर सकता है? शिव नारायण शर्मा ने बताया कि वह एक संरक्षक की भूमिका में थे, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मानव महाजन बताते हैं कि दो साल पहले वह नकवी पार्क में टहल रहे थे। सुबह के 6 बजे थे, तभी उन्हें किसी व्यक्ति ने पीछे से हाथ मारा, वह एकाएक ठहर गए। देखा तो भवानी सिंह थे।

नियमित चलना जीवन का काम

मानव महाजन बताते हैं कि उनके आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं रहा। देररात तक बैठक और संगठन का कार्य करने के बाद भी वह सुबह पार्क में सही समय पर टहलने आ गए। अमूमन देररात तक काम करने वाला व्यक्ति सुबह देरी से उठता है, मगर भवानी सिंह एकदम तरोताजा होकर टहल रहे थे। फिर उन्होंने कहा कि नियमित चलना जीवन का काम है, इसलिए आगे बढ़ते रहो और चलते रहो। बातों ही बातों में उन्होंने जीवन की बढ़ी सीख दी। मानव ने कहा कि भाजपा को पश्चिमी यूपी में मजबूत करने का काम किया। वाराणसी में उन्हें जिम्मेदारी मिली तो उसे भी बखूली निभाया। बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव में भी उन्होंने अहम भूमिका अदा की।

Edited By: Anil Kushwaha