जेएनएन, अलीगढ़ : राममंदिर निर्माण के लिए चले संघर्ष में अलीगढ़ के लोगों का भी खास योगदान था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्वहिंदू परिषद के तमाम ऐसे कार्यकर्ता थे जो 1990 के समय आंदोलन में कूदे। कई कार्यकताओं ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था। विहिप नेता सिद्धार्थ मोहन बताते हैं कि उस समय कार्यकर्ताओं में उत्साह था। वे 1990 में विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल को बाइक से अयोध्या ले गए थे। 

अतरौली के गांव बिजौली निवासी अशोक सिंघल को अलीगढ़ से एटा बैठक में जाना था। सिद्धार्थ मोहन बाइक से उन्हें एटा लेकर निकले। फिर, उनसे कहा गया कि फर्रुखाबाद तक लेकर चलो। सिद्धार्थ उस समय बजरंग दल में थे, युवा जोश था। सिंघल को लेकर फर्रुखाबाद पहुंच गए। वहां बैठक समाप्त हुई। अशोक सिंघल पर उस समय पहरा था। पुलिस-प्रशासन ने अयोध्या में उन्हें प्रतिबंधित कर रखा था। तय किया गया कि बाइक से उन्हें अयोध्या पहुंचाया जाए। सिद्धार्थ तैयार हो गए और बाइक से लेकर अयोध्या पहुंच गए। सिद्धार्थ बताते हैं कि दो दिन में अयोध्या पहुंचे थे। सिंघल पीछे अंगोछा से मुंह को ढके हुए थे, जिससे कोई पहचान न सके। वे उन्हें मुख्य मार्ग से न होकर, गांवों से निकालकर ले गए थे क्योंकि जगह-जगह चेकिंग चल रही थी। सिद्धार्थ मोहन कहते हैं कि अशोक सिंघलजी का सपना हकीकत में बदल गया।

भगवान सिंह हुए थे बलिदान 

नगला जुझार क्षेत्र के गांव नगला बलराम निवासी जवाहर सिंह के पुत्र भगवान सिंह 1990 में अयोध्या में शहीद हुए थे। भगवान सिंह के भतीजे हरिओम ने बताया कि चाचा भगवान सिंह आरएसएस से जुड़े थे। 1990 में वे परिवार वालों को बिना बताए ईंट लेकर अयोध्या चले गए थे। उस समय उनकी उम्र 23 साल थी। वहां गोली चली और शहीद हो गए। 1992 में भाजपा नेता कलराज मिश्र ने गांव में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था। 

Posted By: Sandeep Saxena

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