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    यूपी में रहस्यमयी कीड़े का आतंक, गांव में सन्नाटा, बच्चों ने स्कूल जाना तक छोड़ दिया; दहशत में लोग

    Updated: Fri, 04 Jul 2025 11:22 PM (IST)

    अलीगढ़ के भकरौला गांव में एक अज्ञात कीड़े के आतंक से दहशत है। 24 दिनों में 28 लोगों को काटा जिनमें एक महिला की मौत हो गई। पीड़ितों को जलन और खून निकलने की शिकायत है। स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है पर कीड़े की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। गांव में डर का माहौल है लोग घरों में कैद हैं।

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    कीड़े की दहशत, बच्चों ने स्कूल तक छोड़ा।

    जागरण संवाददाता, अलीगढ़। नगर निगम क्षेत्र में शामिल गांव भकरौला में कीड़े ने दहशत फैला रखी है। लोगों के शरीर पर अचानक जलन होती है। खून निकल आता है। 24 दिन में 28 लोगों को कीड़ा काट चुका है। इनमें से एक महिला की मृत्यु हो चुकी है। कौन सा कीड़ा काट रहा है यह अभीतक स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन पता नहीं लगा सका है।

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    इससे बचाव के ठोस उपाय भी नहीं हो सके हैं। हाल यह है कि लोग डरे हुए हैं। खुद को घरों में कैद करना मजबूरी है। दहशत में बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। शुक्रवार को भी गांव की सड़कों पर सन्नाटा पसरा था। खेतों में कोई नहीं था। काम करने कम ही लोग गए थे।

    गर्मी के बाद भी कई घरों की खिड़की व दरवाजे बंद थे। इसके पीछे कीड़े का डर था। पीड़ितों के अनुसार कीड़ा नजर नहीं आता।

    कब काट गया, यह भी पता नहीं लगता। लगभग पांच हजार की आबादी वाले दलित व लोधी बाहुल्य गांव में सबसे पहले 11 जून को मीरा देवी कीड़े का शिकार हुईं। अचेतावस्था में मेडिकल कालेज ले जाया गया, यहां मृत्यु हो गई। इसके बाद तो पीड़ितों की संख्या बढ़ती चली गई। 29 जून तक नौ पीड़ितों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर दवा दी और फागिंग कराई। गुरुवार की रात रोहित को कीड़े ने काटा। उन्होंने बताया कि वह घर में सो रहे थे, तभी दायीं आंख के ऊपर किसी के छूकर गुजर जाने का एहसास हुआ। फिर तेज जलन महसूस हुई। हाथ पर खून लगा था।

    गांव के ही रामपाल तो अधिकारियों पर भड़क उठे। बोले, इतने लोगों को कीड़ा काट चुका है। क्या हम केवल पीड़ितों की गिनती करते रहें। कोई ठोस उपाय तो हो।

    सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि मरीजों में घबराहट के अतिरिक्त कोई गंभीर लक्षण नहीं नजर आए हैं। ब्लड सैंपल में भी कुछ नहीं निकला है। वन विभाग व पशुपालन विभाग को पत्र लिखा था।

    किसी के देखे न जाने के कारण कीड़े की पहचान नहीं हो सकी। मरीजों के लिए गांव स्थायी रूप से कैंप व एंबुलेंस की व्यवस्था कर दी है। ग्रामीणों से अपील है कि भयभीत न हों।