फोटो-इंद्रियों के सत्संग करने पर प्राप्त होता है ज्ञान
-नगरिया गौरोला में भागवत कथा की अमृतवर्षा
जट्टारी : गांव नगरिया गौरोला में चल रही भागवत कथा में नरेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग, त से त्याग की प्राप्ति होती है। उसे भागवत ज्ञान कहते हैं। भागवत कथा भगवान के मुख की वाणी है। भागवत भक्तिरस में डुबाने वाला एक साधन है। भागवत से तीन चीजें पवित्र होती हैं वे हैं भोजन, मरण, भजन। आत्मदेव जीवात्मा से धुंधली बुद्धि है। मन धुंधकारी और गौकर्ण ज्ञान है। अज्ञान के आवरण में काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, द्वेष, ईष्र्या हर मानव, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, उसकी बुद्धि धुंधली हो जाती है। मन धुंधकारी बन जाता है। गौ माने इन्द्रियां। इन्द्रियां जब सत्संग करने लगती हैं तो गौकर्ण माने ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो सातों गांठ चटक जाती हैं। परमात्मा का दिव्य धाम प्राप्त हो जाता है। इससे पूर्व गांव में कलशयात्रा निकाली गई, जिसमें क्षेत्र की सभी माताओं, बहनों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर सुरेन्द्र सिंह, टेकचंद शर्मा, रामवीर सिंह, विशाल सिंह भगतजी, सतवीर सिंह, लाल सिंह, जगवीर सिंह, नानक चंद्र, त्रिलोक भगतजी, उमेद सिंह बापू, डिगम्बर सिंह, जगवीर सिंह आदि थे।
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