आगरा, निर्लोष कुमार। संस्कृति मंत्रालय ने संसद में फतेहपुर सीकरी की राक पेंटिंग्स (शैल चित्रों) को राष्ट्रीय महत्व के स्थल के रूप में चिह्नित कर उनके संरक्षण को कार्य करने की बात कही है। अरावली की पहाड़ी श्रृंखला में फतेहपुर सीकरी स्थित राक शेल्टर्स (शैलाश्रय) में बनीं राक पेंटिंग्स (शैल चित्र) करीब सात हजार वर्ष पुरानी हैं।

फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, मदनपुरा, पतसाल और जाजाली में सात हजार वर्ष पहले (उत्तर पाषण काल) से लेकर गुप्त काल (तीसरी शताब्दी तक) के मध्य बनी राक पेंटिंग्स हैं। 80 के दशक में राक आर्ट सोसायटी आफ इंडिया के सचिव पुरातत्वविद् डा. गिरिराज कुमार ने रसूलपुर में 12, मदनपुरा में तीन, जाजाली में आठ और पतसाल में चार राक शेल्टर्स की खोज की थी। इतिहासविद् राजकिशोर राजे ने अपनी पुस्तक 'तवारीख-ए-आगरा' में लिखा है कि पतसाल व मदनपुरा की राक शेल्टर्स सर्वाधिक चित्रित हैं। इनमें बने चित्र उत्तर पाषाण काल से लेकर गुप्त काल तक के हैं। पतसाल में पेड़-पौधे, पशु समूह, नृत्य व हथियारों से संबंधित चित्र हैं। मदनपुरा में दंतीला हाथी, नील गाय, दो सांड़ और रसूलपुर में जटिल अल्पना चित्र हैं। चित्रों में लाल व काले रंग का प्रयोग किया गया है। अधीक्षण पुरातत्वविद डा. वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि फतेहपुर सीकरी की राक पेंटिंग्स के बारे में वर्ष 1959 में शोध पत्र प्रकाशित हुआ था। यह नेचुरल साइट है।

संरक्षित स्मारक घोषित करने को होंगे नोटिफिकेशन

किसी भी स्मारक को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर संरक्षित करने की प्रकिया में काफी समय लगता है। पहले प्रीलिमिनरी नोटिफिकेशन होता है। उस पर आई आपत्तियों के निस्तारण के बाद फाइनल नोटिफिकेशन किया जाता है।

संरक्षित का दर्जा मिलेगा, लेकिन काम नहीं कर सकेंगे

एएसआइ द्वारा राक शेल्टर्स को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक तो घोषित कर दिया जाएगा, लेकिन यहां संरक्षण कार्य नहीं हो सकेगा। राक शेल्टर्स, नेचुरल साइट्स हैं। यहां किसी भी तरह का संरक्षण कार्य करना, शेल्टर्स के साथ एक तरह की छेड़छाड़ ही हाेगा। यहां काम करने पर शेल्टर्स को भी क्षति पहुंच सकती है।

विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण

ये रॉक पेंटिंग्‍स विदेशी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण हैं। हालांकि दिल्‍ली के टूर ऑपरेटर्स फतेहपुरसीकरी को जल्‍दबाजी में घुमाते हैं क्‍योंकि उनको पर्यटकों को एक ही दिन में आगरा भ्रमण कराकर रात को वापस दिल्‍ली के होटल में ले जाना होता है, लेकिन जो पर्यटक बिना किसी ऑपरेटर की सहायता से यहां पहुंचते हैं। वे गाइड की मदद से पहाडि़यों पर बनी इन पेंटिंग्‍स को देखने जरूर जाते हैं। यदि इन पेटिंग्‍स का पर्याप्‍त प्रचार प्रसार हो तो पर्यटकों के लिए ये एक नया आकर्षण साबित हो सकता है, जैसे भोपाल के पास भीम बेटिका है।

Edited By: Prateek Gupta